
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2003 के रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी माना। इससे पहले 2007 में निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया।
यह मामला करीब दो दशक पुराना है और लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।
फैसले के बाद अमित जोगी ने कहा है कि वे इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अंतिम निर्णय अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा, जहां इस मामले की आगे सुनवाई हो सकती है।
इस बीच, पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और इसे न्याय की दिशा में अहम कदम बताया है।




