
चार राज्यों में वांछित नक्सली नेता ‘देवजी’ ने किया सरेंडर, डेढ़ करोड़ रुपये का था इनाम
रायपुर/जगदलपुर: सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही एक कार्रवाई में ‘देवजी’ नाम से पहचाने जाने वाले एक शीर्ष नक्सली नेता ने आत्मसमर्पण कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, उन पर कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और उनकी तलाश चार राज्यों की पुलिस लंबे समय से कर रही थी।
कौन हैं ‘देवजी’?
पुलिस सूत्रों का कहना है कि ‘देवजी’ संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल रहे हैं और कई बड़े हमलों की रणनीति बनाने में उनकी भूमिका बताई जाती रही है। वे पिछले कई वर्षों से भूमिगत थे और अलग-अलग इलाकों में सक्रिय दस्ताें के समन्वय की जिम्मेदारी संभालते थे।
अधिकारियों के मुताबिक, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा की पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों और हिंसक घटनाओं के आधार पर उन पर इनाम की राशि क्रमशः बढ़ाई गई थी, जो कुल मिलाकर करीब 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
सरेंडर कैसे हुआ?
पुलिस के अनुसार, देवजी ने सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों ने बताया कि हाल के महीनों में चलाए गए अभियान और लगातार दबाव के कारण संगठन के कई सदस्य मुख्यधारा में लौटने का विकल्प चुन रहे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा, “सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार सुरक्षा अभियानों का असर दिख रहा है। शीर्ष स्तर के नेता का सरेंडर करना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
पुनर्वास और आगे की प्रक्रिया
अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और मुख्यधारा में लौटने के अवसर दिए जाते हैं। हालांकि, देवजी के खिलाफ दर्ज मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
सुरक्षा पर क्या असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व स्तर पर सरेंडर से संगठन की रणनीतिक क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि किसी एक नेता के आत्मसमर्पण से पूरी गतिविधि पर तत्काल प्रभाव का आकलन करना जल्दबाजी होगी
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इसे बड़ी उपलब्धि बता रही हैं और अन्य सक्रिय सदस्यों से भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील कर रही हैं।




