
नारायणपुर, 16 सितंबर 2026। किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने बुधवार को तहसील स्तर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदेश कार्यकारिणी के निर्देश पर जिला अध्यक्ष नीलकण्ठ नाग के नेतृत्व में नारायणपुर कोहकामेटा तहसील अध्यक्ष पवन सेठिया, सत्य नारायण उसेंडी सहित संघ के सदस्यों ने किसानों से जुड़े 11 प्रमुख मुद्दों को ज्ञापन में शामिल किया।
भारतीय किसान संघ ने किसानों की आय, धान खरीदी, सिंचाई व्यवस्था, कृषि लागत, जैविक खेती और गौ संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर शासन से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। संघ का कहना है कि किसान और गौवंश छत्तीसगढ़ की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए गौ आधारित जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को पारंपरिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
धान खरीदी की लंबित राशि और कृषक उन्नति योजना का मुद्दा प्रमुख
ज्ञापन में वर्ष 2022 23 की धान खरीदी से संबंधित लगभग 1700 करोड़ रुपये की लंबित राशि किसानों को तत्काल दिलाने की मांग की गई है। इसके साथ ही कृषक उन्नति योजना के तहत मिलने वाली राशि को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य से जोड़ने तथा सब्जी और फल उत्पादक किसानों को भी योजना के दायरे में शामिल करने की मांग रखी गई है।
संघ ने आगामी धान खरीदी अवधि 5 नवंबर से 5 फरवरी तक निर्धारित करने की मांग की है। साथ ही धान तौल के दौरान किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित सीमा से अधिक धान लिए जाने पर रोक लगाने की बात कही गई है। ज्ञापन में धान खरीदी के दौरान किसानों पर अनावश्यक दबाव डालकर खाता समर्पण कराने की प्रक्रिया बंद करने की मांग भी की गई है।
टोकन और पंजीयन व्यवस्था में किसानों को राहत देने की मांग
भारतीय किसान संघ ने एग्रीस्टैक में शामिल खातेदारों के पंजीयन से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया है। संघ ने पंजीयन संबंधी अनिवार्यता में आवश्यक सुधार करने और किसानों की सुविधा के लिए टोकन व्यवस्था को सरल बनाने की मांग की है।
ज्ञापन में बड़े किसानों को पांच, लघु किसानों को तीन और सीमांत किसानों को दो टोकन दिए जाने का सुझाव रखा गया है। संघ का कहना है कि धान खरीदी की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
सिंचाई परियोजनाओं को गति देने और खाद की कालाबाजारी रोकने की मांग
किसानों ने सिंचाई से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है। अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने और जहां सिंचाई की पर्याप्त संभावनाएं हैं, वहां नई परियोजनाओं को स्वीकृति देने की मांग की गई है।
इसके अलावा गन्ने के फसल मूल्य में 150 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि कर उसे कृषक उन्नति योजना से जोड़ने की मांग रखी गई है। कृषि विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने तथा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
भूमि अधिग्रहण और किसानों के अधिकारों से जुड़े विषय भी उठाए
प्रेस नोट के साथ संलग्न दस्तावेजों में भारतीय एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के उदयपुर डिक्लेरेशन का भी उल्लेख किया गया है। इसमें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन, किसानों के मुआवजे और सामाजिक प्रभाव आकलन से जुड़े विषयों पर सुझाव दिए गए हैं।
दस्तावेज में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा तथा प्रभावित परिवारों के समुचित पुनर्वास पर जोर दिया गया है।
गौ आधारित खेती और देशी गाय के संरक्षण पर भी जोर
भारतीय किसान संघ की प्रदेश प्रतिनिधि सभा में रायपुर में 30 और 31 मार्च 2026 को पारित प्रस्तावों का भी ज्ञापन के साथ उल्लेख किया गया है। इसमें गौ आधारित कृषि को बढ़ावा देने, देशी गाय के संरक्षण और संवर्धन, गौ उत्पादों के उपयोग तथा विद्यालयी शिक्षा में गौ आधारित जैविक कृषि को शामिल करने जैसे विषय उठाए गए हैं।
भारतीय किसान संघ ने शासन से किसानों से जुड़े सभी 11 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार करने और लंबित समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की है। संघ ने उम्मीद जताई है कि किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए शासन स्तर पर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
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