
दंडकारण्य दर्पण
कांकेर में खूंखार भालू का आतंक, दो ग्रामीणों की मौत के बाद उग्र हुआ जनाक्रोश
कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में इंसान और वन्यजीव संघर्ष का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। जिले के नरहरपुर वन परिक्षेत्र के लारगांव-मारकटोला क्षेत्र में एक मादा भालू के हमले में दो ग्रामीणों की मौत हो गई, जबकि अन्य लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार ग्रामीण खेतों में काम कर रहे थे, तभी अचानक मादा भालू वहां पहुंच गई और लोगों पर हमला कर दिया। हमले में दो ग्रामीणों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आसपास के गांवों में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि भालू काफी देर तक घटनास्थल के आसपास ही मौजूद रही, जिससे वन विभाग और ग्रामीण मृतकों तक नहीं पहुंच सके। सूचना मिलने के बाद वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद विशेषज्ञों ने भालू को ट्रैंक्विलाइज़र गन की मदद से बेहोश किया।
इसी दौरान अपने परिजनों की मौत से गुस्साए कुछ ग्रामीणों ने बेहोश पड़े भालू पर डंडों से हमला कर दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि मौके पर मौजूद वन विभाग और पुलिस कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और भालू को ग्रामीणों से बचाकर अपने कब्जे में ले लिया।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मादा भालू का शावक एक दिन पहले मर गया था। आशंका है कि इसी कारण वह अत्यधिक आक्रामक हो गई थी और उसने ग्रामीणों पर हमला किया।
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से भालुओं की आवाजाही की सूचना दी जा रही थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, घायलों का बेहतर इलाज और क्षेत्र में वन्यजीवों की निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगल या उसके आसपास के क्षेत्रों में अकेले न जाएं और किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना दें। अधिकारियों ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर बस्तर संभाग में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर चुनौती को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप, प्राकृतिक आवास में कमी और भोजन की तलाश में वन्यजीवों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आना ऐसी घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है। ऐसे में मानव जीवन की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।




