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CG: जंगल का सफेद सोना, जंगली मशरूम से महका नारायणपुर का बाजार

दीमक के टीलों से निकला फूटू, ग्रामीणों के लिए बना कमाई का बड़ा सहारा

 

 

नारायणपुर के बाजार में जंगली मशरूम की बंपर आवक, ग्रामीणों को मिल रहा अतिरिक्त रोजगार

नारायणपुर, 4 अगस्त। लगातार हो रही बारिश के बाद नारायणपुर जिले के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में इस वर्ष जंगली मशरूम की भरपूर पैदावार देखने को मिल रही है। मंगलवार को नगर के दैनिक बाजार में बड़ी मात्रा में जंगली मशरूम पहुंचा, जहां ग्रामीण सुबह से ही इसे बेचने के लिए जुटे रहे। बाजार में मशरूम की अधिक आवक के बावजूद खरीदारों की अच्छी संख्या देखने को मिली और ग्रामीणों ने इससे अच्छी आमदनी अर्जित की।

 

नारायणपुर जिले के जंगलों, खेतों की मेड़ों और दीमक के टीलों के आसपास बरसात के मौसम में प्राकृतिक रूप से जंगली मशरूम उगता है। स्थानीय भाषा में इसे फूटू भी कहा जाता है। यह मशरूम किसी खेती से नहीं बल्कि प्राकृतिक रूप से जमीन के भीतर बने दीमक के घरों के आसपास निकलता है। लगातार बारिश और अनुकूल वातावरण के कारण जिले के कई गांवों में इन दिनों इसकी भरपूर पैदावार हो रही है।

 

ग्रामीण सुबह-सुबह जंगलों और खेतों में पहुंचकर मशरूम एकत्रित करते हैं और उसे नारायणपुर के दैनिक बाजार में बिक्री के लिए लाते हैं। बरसात के इस मौसम में जंगली मशरूम ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन बन जाता है। कई परिवार केवल मशरूम बेचकर प्रतिदिन अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं।

 

विशेषज्ञों के अनुसार जंगली मशरूम की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन नारायणपुर क्षेत्र का फूटू अपने विशेष स्वाद, प्राकृतिक गुणवत्ता और पौष्टिकता के कारण काफी लोकप्रिय है। स्थानीय लोग इसे पारंपरिक व्यंजनों में बड़े चाव से उपयोग करते हैं। इसकी मांग केवल नारायणपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर संभाग के अन्य जिलों के साथ-साथ प्रदेश के बड़े शहरों में भी रहती है।

 

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार नारायणपुर से बड़ी मात्रा में जंगली मशरूम खरीदकर रायपुर, दुर्ग, भिलाई, जगदलपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव सहित कई शहरों में भेजा जाता है। वहां इसकी अच्छी कीमत मिलने के कारण व्यापारी भी इसे खरीदने में रुचि दिखाते हैं।

 

जंगली मशरूम का मौसम सीमित समय के लिए ही रहता है। सामान्यतः कुछ सप्ताह या एक-दो महीने तक इसकी उपलब्धता रहती है। बारिश कम होने के साथ ही इसका उत्पादन स्वतः समाप्त हो जाता है। यही कारण है कि बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है और मौसम के दौरान इसकी बिक्री तेज हो जाती है।

 

नारायणपुर की प्राकृतिक जैव विविधता और घने वन क्षेत्र इस मशरूम की पैदावार के लिए अनुकूल माने जाते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में जिले के ग्रामीणों को प्राकृतिक संसाधनों से अतिरिक्त रोजगार और आय का अवसर मिलता है। जंगली मशरूम न केवल स्थानीय लोगों के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रहा है।

Bindesh Patra

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