
अबूझमाड़ के पदमकोट में कौशल विकास की नई पहल, युवाओं को मिलेगा रोजगार का रास्ता
आईटीबीपी ने मॉडल ग्राम योजना के तहत आयोजित किया प्रशिक्षण शिविर, इलेक्ट्रिशियन और बढ़ईगीरी सहित कई कौशलों की दी जानकारी
नारायणपुर। अबूझमाड़ के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्र पदमकोट में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 41वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) ने कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। मॉडल ग्राम पदमकोट को विकसित करने की कार्ययोजना के तहत आयोजित इस शिविर का उद्देश्य स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उनके लिए स्वरोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर तैयार करना है।
दंडकारण्य दर्पण शैली में तैयार समाचार:
अबूझमाड़ के पदमकोट में कौशल विकास की नई पहल, युवाओं को मिलेगा रोजगार का रास्ता
आईटीबीपी ने मॉडल ग्राम योजना के तहत आयोजित किया प्रशिक्षण शिविर, इलेक्ट्रिशियन और बढ़ईगीरी सहित कई कौशलों की दी जानकारी
नारायणपुर। अबूझमाड़ के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्र पदमकोट में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 41वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) ने कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। मॉडल ग्राम पदमकोट को विकसित करने की कार्ययोजना के तहत आयोजित इस शिविर का उद्देश्य स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उनके लिए स्वरोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर तैयार करना है।
सीओबी पदमकोट परिसर में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर का संचालन 41वीं वाहिनी के कमांडेंट बेनुधर नायक के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक कौशलों की जानकारी देते हुए उन्हें आधुनिक रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
पदमकोट और आसपास के अधिकांश ग्रामीण आज भी वन उपज पर निर्भर हैं। ऐसे में उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आईटीबीपी ने यह विशेष पहल शुरू की है। प्रशिक्षण शिविर में इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, बढ़ईगीरी और ड्राइविंग जैसे रोजगारोन्मुखी कौशलों की विस्तृत जानकारी दी गई।
शिविर का संचालन सहायक कमांडेंट दिनेश, एसी वेट महिपाल तथा निरीक्षक राम यादव के नेतृत्व में किया गया। प्रशिक्षकों ने ग्रामीणों को इन व्यवसायों की उपयोगिता, रोजगार की संभावनाओं और प्रशिक्षण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सहायक कमांडेंट दिनेश ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल ही रोजगार और आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी कुंजी हैं। उन्होंने युवाओं से किसी न किसी कौशल में दक्षता हासिल कर अपने जीवन को नई दिशा देने का आह्वान किया।
आईटीबीपी अधिकारियों ने बताया कि इच्छुक युवाओं और ग्रामीणों को सीओबी पदमकोट के माध्यम से निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। विशेष रूप से बढ़ईगीरी और इलेक्ट्रिशियन कार्यों के लिए 14 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागियों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
शिविर में शामिल ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम गांव के युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई संभावनाएं खोलेंगे। ग्रामीणों ने भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की मांग की।
दंडकारण्य दर्पण विशेष
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में कौशल विकास की यह पहल केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकास की नई सोच का परिचायक है। सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आईटीबीपी का यह प्रयास ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पदमकोट को आदर्श मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जंगलों के बीच बसे इस गांव में अब रोजगार और आत्मविश्वास की नई किरण दिखाई देने लगी है।
सीओबी पदमकोट परिसर में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर का संचालन 41वीं वाहिनी के कमांडेंट बेनुधर नायक के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक कौशलों की जानकारी देते हुए उन्हें आधुनिक रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
पदमकोट और आसपास के अधिकांश ग्रामीण आज भी वन उपज पर निर्भर हैं। ऐसे में उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आईटीबीपी ने यह विशेष पहल शुरू की है। प्रशिक्षण शिविर में इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, बढ़ईगीरी और ड्राइविंग जैसे रोजगारोन्मुखी कौशलों की विस्तृत जानकारी दी गई।
शिविर का संचालन सहायक कमांडेंट दिनेश, एसी वेट महिपाल तथा निरीक्षक राम यादव के नेतृत्व में किया गया। प्रशिक्षकों ने ग्रामीणों को इन व्यवसायों की उपयोगिता, रोजगार की संभावनाओं और प्रशिक्षण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सहायक कमांडेंट दिनेश ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल ही रोजगार और आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी कुंजी हैं। उन्होंने युवाओं से किसी न किसी कौशल में दक्षता हासिल कर अपने जीवन को नई दिशा देने का आह्वान किया।
आईटीबीपी अधिकारियों ने बताया कि इच्छुक युवाओं और ग्रामीणों को सीओबी पदमकोट के माध्यम से निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। विशेष रूप से बढ़ईगीरी और इलेक्ट्रिशियन कार्यों के लिए 14 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागियों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
शिविर में शामिल ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम गांव के युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई संभावनाएं खोलेंगे। ग्रामीणों ने भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की मांग की।
दंडकारण्य दर्पण विशेष
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में कौशल विकास की यह पहल केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकास की नई सोच का परिचायक है। सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आईटीबीपी का यह प्रयास ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पदमकोट को आदर्श मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जंगलों के बीच बसे इस गांव में अब रोजगार और आत्मविश्वास की नई किरण दिखाई देने लगी है।




