अवैध वसूली के आरोपों पर पुलिस विभाग की कार्रवाई, चौकी प्रभारी दीपा केंवट और एएसआई चेतन साहू लाइन अटैच
हल्बा क्षेत्र के करीब 20 गांवों के जनप्रतिनिधियों ने की थी शिकायत, प्रशिक्षु एसआई पीयूष यादव को मिली चौकी की कमान
कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के चारामा विकासखंड अंतर्गत हल्बा क्षेत्र में पुलिसकर्मियों पर कथित अवैध वसूली के आरोपों के बाद पुलिस विभाग ने प्रशासनिक कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने हल्बा चौकी प्रभारी दीपा केंवट और सहायक उप निरीक्षक चेतन साहू को चौकी से हटाकर लाइन अटैच कर दिया है। वहीं प्रशिक्षु उप निरीक्षक पीयूष यादव को हल्बा चौकी का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।

करीब 20 गांवों के जनप्रतिनिधियों ने की थी शिकायत
मामले के अनुसार, हल्बा क्षेत्र के करीब 20 गांवों के जनप्रतिनिधियों ने महिला चौकी प्रभारी और एक एएसआई पर अवैध वसूली, पैसों की मांग करने और मांग पूरी नहीं होने पर ट्रैक्टर जब्त करने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए थे। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा से मुलाकात की और लिखित शिकायत सौंपते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को हटाने तथा निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
रेत परिवहन को लेकर लगाए गए आरोप
जनप्रतिनिधियों के मुताबिक, महानदी किनारे बसे गांवों के ग्रामीण ग्राम पंचायत की अनुमति से घरेलू उपयोग के लिए ट्रैक्टर के माध्यम से रेत का परिवहन करते हैं। आरोप है कि इस दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर पैसों की मांग की जाती थी। मांग पूरी नहीं होने पर ट्रैक्टर जब्त करने और कार्रवाई करने की धमकी दिए जाने की बात भी शिकायत में उठाई गई थी।
शिकायत के बाद पुलिस विभाग ने उठाया कदम
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने आदेश जारी कर चौकी प्रभारी दीपा केंवट और एएसआई चेतन साहू को हल्बा चौकी से हटाकर लाइन अटैच कर दिया। वहीं प्रशिक्षु उप निरीक्षक पीयूष यादव को चौकी की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही पर टिकी नजरें
जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद हुई इस कार्रवाई को मामले में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। हालांकि, लाइन अटैच किया जाना अपने आप में आरोपों की पुष्टि या दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आरोपों की जांच, संबंधित पक्षों का बयान और जांच के निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
अब क्षेत्र के लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं और जांच के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
दण्डकारण्य दर्पण सच के साथ, समाज के साथ।



