
बस्तर की ओर बढ़ा बारिश का सिस्टम, छत्तीसगढ़ में चार दिन भारी बारिश का अलर्ट
आंध्र प्रदेश तट पर डीप डिप्रेशन का असर, 24 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी; बस्तर में नदी नालों और निचले इलाकों में सतर्कता जरूरी
नारायणपुर। बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन का असर अब तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के बाद मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक 24 सितंबर की सुबह यह सिस्टम उत्तर आंध्र प्रदेश तट के पास सक्रिय था और कलिंगपट्टनम के आसपास तट पार करने की प्रक्रिया में था। इसके बाद सिस्टम के उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और अगले कुछ समय तक डीप डिप्रेशन की तीव्रता बनाए रखने के बाद धीरे धीरे कमजोर होने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में चार दिन बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के लिए 24 से 27 सितंबर तक लगातार बारिश की चेतावनी जारी की है। 24 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश, 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश तथा 27 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन दिनों गरज चमक और आंधी जैसी मौसम गतिविधियां भी हो सकती हैं।
बस्तर संभाग पर भी नजर
दक्षिण छत्तीसगढ़ में इस मौसम प्रणाली का असर विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। बस्तर संभाग के नारायणपुर, बस्तर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे जिलों में लगातार बारिश होने पर नदी नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
हालांकि अभी किसी बड़े पैमाने की तबाही का निश्चित अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। बारिश की वास्तविक तीव्रता स्थानीय परिस्थितियों और सिस्टम की आगे की दिशा पर निर्भर करेगी। इसलिए लोगों को अफवाहों के बजाय मौसम विभाग और जिला प्रशासन के आधिकारिक अलर्ट पर भरोसा करना चाहिए।
नदी नालों से दूर रहने की जरूरत
बस्तर के वन और पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के दौरान छोटी नदियों और नालों में अचानक पानी बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में ग्रामीणों और यात्रियों को उफनते नालों को पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
पुलिया या रपटे के ऊपर पानी बह रहा हो तो वाहन लेकर पार करने से बचना चाहिए। नदी किनारे रहने वाले परिवारों को लगातार बारिश की स्थिति में सुरक्षित और ऊंचे स्थान की जानकारी पहले से रखनी चाहिए।
कच्चे मकानों और कमजोर भवनों पर भी नजर
लगातार बारिश से जमीन में नमी बढ़ने के कारण कच्चे मकानों और कमजोर दीवारों के गिरने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मकानों में रहने वाले परिवारों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
बारिश के दौरान पेड़, बिजली के खंभे और पुराने भवनों के आसपास खड़े होने से भी बचना चाहिए। आकाशीय बिजली की स्थिति में खुले मैदान, पेड़ और ऊंचे स्थानों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
नारायणपुर और अबूझमाड़ में विशेष सतर्कता
नारायणपुर जिले के दूरस्थ और वन क्षेत्र में बारिश के दौरान आवागमन प्रभावित होने की संभावना रहती है। अबूझमाड़ के कई इलाकों में नदी नाले और कच्चे रास्ते हैं। लगातार बारिश की स्थिति में इन रास्तों पर पानी और कीचड़ बढ़ सकता है।
दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को जरूरी सामान, पीने का पानी, दवाइयां, टॉर्च और मोबाइल फोन चार्ज रखने की सलाह दी जाती है। नेटवर्क या बिजली बाधित होने की स्थिति में प्रशासन और स्थानीय स्तर पर संपर्क व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी होगा।
अभी घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत
मौसम विभाग के वर्तमान पूर्वानुमान में छत्तीसगढ़ में अगले चार दिनों के दौरान भारी बारिश की संभावना स्पष्ट है। लेकिन इसे सीधे बड़े विनाश या तबाही का संकेत मानना सही नहीं होगा। स्थानीय स्तर पर बारिश की मात्रा अलग अलग हो सकती है।
सबसे ज्यादा सावधानी नदी नालों के आसपास, निचले इलाकों, कच्चे मकानों और दूरस्थ वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बरतनी चाहिए।
दंडकारण्य दर्पण की अपील
बस्तर संभाग के लोगों से अपील है कि भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। नदी नालों और रपटों के जलस्तर को पार करने का जोखिम न लें। बच्चों को जलभराव वाले स्थानों और नदी नालों के पास न जाने दें। मौसम विभाग और जिला प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन की मदद लें।
मौसम विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ में 24 सितंबर को अत्यंत भारी, 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी तथा 27 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी है। इसके बाद 28 सितंबर से राज्य के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।




