National: अमित शाह बोले – भय के माहौल से बाहर निकलकर बस्तर आज खुली सांस ले रहा, सेवा और विकास सरकार की प्राथमिकता
नक्सलमुक्त बस्तर की ओर बढ़ते कदम, अब विकास और विश्वास की नई तस्वीर

जगदलपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने बस्तर को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि आज पूरे बस्तर में उत्साह, विश्वास और भविष्य को लेकर आश्वस्तता का माहौल दिखाई दे रहा है। वर्षों तक भय और नक्सल हिंसा के साये में रहने वाला बस्तर अब तेजी से बदलाव की ओर बढ़ रहा है और लोग खुलकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
अमित शाह ने कहा कि बस्तर में अब लोगों के भीतर डर का वातावरण खत्म होता नजर आ रहा है। गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था पहुंचने से लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि आज का बस्तर पहले की तुलना में काफी बदल चुका है और यहां विकास की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में भाजपा सरकारों ने नक्सल उन्मूलन अभियान में केंद्र सरकार का सहयोग किया, लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि 13 दिसंबर 2023 को प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद बस्तर में बचे हुए नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए फिर से व्यापक अभियान शुरू किया गया।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए करीब 200 सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए थे। अब क्षेत्र में नक्सल प्रभाव कम होने और हालात सामान्य होने के बाद इन कैंपों को जनसेवा से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
अमित शाह ने घोषणा करते हुए कहा कि प्रथम चरण में 70 सुरक्षा कैंपों को वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा में बदला जाएगा। इन सेवा डेरों का मुख्य उद्देश्य बस्तर के आदिवासी परिवारों तक शासन की योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं को सीधे पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी भाई-बहनों को शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाएं उनके गांव के नजदीक ही उपलब्ध हों।
उन्होंने कहा कि बस्तर अब केवल सुरक्षा अभियान का क्षेत्र नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और जनसेवा का केंद्र बन रहा है। आने वाले समय में यहां आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि युवाओं को नई दिशा मिल सके और बस्तर स्थायी रूप से शांति और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ सके।




