header ads
कृषिराष्ट्रीयरोजगारस्वास्थ्य

एक बार लौंग की बागवानी लगाकर अगले डेढ़ सौ सालो तक आप प्रति एकड़ से 3 लाख की आमदनी प्राप्त कर सकते हैं!

एक बार लौंग की बागवानी लगाकर अगले डेढ़ सौ सालो तक आप प्रति एकड़ से 3 लाख की आमदनी प्राप्त कर सकते हैं!

कृषि संदेश

 

दादी-नानी के कहानियों से लेकर हमारे दिनचर्या का हिस्सा है लौंग!
आपने लौंग के फायदों के बारे में अक्सर सुना होगा. भारतीय मसालो में लौंग (Cloves) का इस्तेमाल खाने के स्वाद और खुशबू को बढ़ाने के लिए किया जाता है। हर घर के रसोई में मौजूद लौंग सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं सेहत के लिए भी अच्छे हैं। आपको जानकर आपको हैरानी हो सकती है. लौंग को मसाले और पूजा पाठ के काम में इस्तेमाल किया जाता है. पुरुषों के लिए लौंग के बहुत से लाभ होते हैं।

लौंग अपनी महक से जहां स्वाद बढ़ाने का काम करती है, वहीं कई ऐसी बीमारियों को भी ठीक करने का काम भी करती है जो आपको लंबे समय से परेशान कर रही हों जैसे, दांतो का दर्द (Clove Oil For Toothache), सांसों की दुर्गंध, गले में खराश (Sore Throat) वगैरह. लौंग में प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम और सोडियम एसिड भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है लौंग कई बीमारियों को जड़ से खत्म करने में कारगर है.
#लौंग_की_खेती

लौंग एक सदाबहार पेड़ है. खास बात है कि इसका पौधा लगाने के बाद 150 साल से भी ज्यादा टाइम तक जीवित रह सकता है.
देश के सभी हिस्सों में लौंग की खेती होती है, लेकिन इसकी खेती तटीय रेतीले इलाकों में नहीं हो सकती. तो वहीं इसकी सफलतापूर्वक खेती केरल की लाल मिटटी और पश्चिमी घाट के पर्वत वाले इलाके में हो सकती है. हम अपने इस लेख में लौंग की खेती के बारे में ही बताने जा रहे है.

उपयुक्त जलवायु एवं मिट्टी

लौंग की खेती को उष्णकटिबंधीय जलवायु में किया जाता है. इसके पौधों को बारिश की जरूरत पड़ती है. साथ ही इसके पौधे तेज़ धूप और सर्दी को सहन नहीं कर पाते हैं. इससे पौधों का विकास रुक जाता है, इसलिए इसके पौधों को छायादार जगहों की ज्यादा जरूरत पड़ती है. इसके अलावा सामान्य तापमान में पौधों का विकास अच्छे से होतो है. अगर गर्मियों का मौसम है तो अधिकतम 30 से 35 तापमान पहना चाहिए. अगर सर्दियों का मौसम है तो न्यूनतम 20 तापमान होना चाहिए. इसकी खेती के लिए नम कटिबंधीय क्षेत्रों की बलुई मिट्टी अच्छी होती है. लौंग के पौधों के लिए जल भराव वाली मिट्टी में नहीं उगा सकते है. इससे पौधा खराब हो जाता है.

लौंग के बीज

लौंग के बीज को तैयार करने के लिए माता पेड़ से पके हुए कुछ फलों को इक्कठा किया जाता है. इसके बाद उनको निकालकर रखा जाता है. जब बीजों की बुआई करनी हो, तब पहले इसको रात भर भिगोकर रखें. इसके बाद बीज फली को बुआई करने से पहले हटा दें.

नर्सरी की तैयारी

बीजों की रोपाई नर्सरी में जैविक खाद का मिश्रण तैयार करें. अब मिट्टी में करीब 10 सेंटीमीटर की दूरी पर पंक्तियां में करनी चाहिए. बता दें कि इसके बीजों से पौध तैयार होने में करीब दो साल तक का समय लगता हैं. और उसके चार से पांच साल बाद पौधा फल देना शुरू करता है. इस तरह पैदावार करीब 7 साल में मिलती है, इसलिए किसान भाई पौधों को नर्सरी से खरीदकर भी खेतों में लगा सकते हैं. इससे समय की बचत होती है. साथ ही पैदावार भी जल्द मिलती है. ध्यान दें कि जब नर्सरी से पौधा खरीदते है, तो पौधा करीब चार फिट से ज्यादा लम्बाई और दो साल पुराना हो.

रोपण करने का तरीका

लौंग के पौध का रोपण मानसून के वक्त किया जाता है. पौध रोपण का समय करीब जून से जुलाई के महीने में करना चाहिए. पौधे को रोपने के लिए करीब 75 सेंटीमीटर लम्बा , 75 सेंटीमीटर चौड़ा और 75 सेंटीमीटर गहरा एक गड्डा खोदकर तैयार कर लें. ध्यान रहे कि एक गड्डे से दूसरे गड्डे की दूरी करीब 6 से 7 सेंटीमीटर हो. इन गड्डे में खाद, हरी पत्तियां और पशु खाद से भर दें. इन सभी खादों को मिटटी की एक परत से ढके.

सिंचाई

लौंग की खेती में करीब 3 से 4 साल में सिंचाई की जरूरत होती है. गर्मियों के मौसम में फसल में लगातार सिंचाई करते रहना चाहिए, जिससे भूमि में नमी बनी रहे.

फलों की तुड़ाई

लौंग के पौधे करीब 4 से 5 साल में फल देना शुरुर कर देते है. इसके फल पौधे पर गुच्छों में लगते हैं. इनका रंग लाल गुलाबी होता है. जिनको फूल खिलने से पहले ही तोड़ लिया जाता है. इसके फल की लम्बाई अधिकतम दो सेंटीमीटर होती है. जिसको सुखाने के बाद लौंग का रूप दिया जाता है.

लौंग का प्रबंधन

लौंग के फूल कलियों को हाथ से अलग करके सबखने के लिए फैला दिया जाता है. जब कली के भाग काले भूरे रंग का हो जाये, तो उन्हें इक्कठा कर लिया जाता है. जिसके बाद लौंग का वजन थोडा कम हो जाता है.

पैदावार और लाभ

लौंग की खेती से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. बाजार में इसकी कीमत अधिक होती है. इसलिए यह मंहगा बिकता है. लौंग के पौधे रोपाई के करीब 4 से 5 साल बाद पैदावार देना शुरू कर देते हैं. वैसे इनसे शुरुआत में पैदावार कम मिलती है, लेकिन जब पौधा पूर्ण रूप से तैयार हो जाता है, तब एक पौधे से एक बार में करीब तीन किलो के आसपास लौंग प्राप्त होने लगता है.

दंडकारण्य दर्पण

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!