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शराब तस्करी रोकने निकले TI को ट्रक से कुचला, अस्पताल में तोड़ा दम; 298 पेटी शराब से भरा वाहन जब्त

खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ड्यूटी के दौरान मौत, शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क पर उठे सवाल; खेप के स्रोत और कथित कारोबारियों की भूमिका की जांच जरूरी

शराब तस्करी रोकने निकले TI को ट्रक से कुचला, अस्पताल में तोड़ा दम; 298 पेटी शराब से भरा वाहन जब्त

 

खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ड्यूटी के दौरान मौत, शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क पर उठे सवाल; खेप के स्रोत और कथित कारोबारियों की भूमिका की जांच जरूरी

 

देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में कथित अवैध शराब तस्करी रोकने के अभियान के दौरान खातेगांव थाना प्रभारी निरीक्षक दिलीप पुरी की जान चली गई। 1 और 2 नवंबर की दरमियानी रात संदिग्ध शराब से भरे ट्रक को रोकने की कोशिश के दौरान वे उसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस विभाग में शोक का माहौल है, वहीं अवैध शराब के कारोबार और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने कार्रवाई के दौरान शराब से भरा एक ट्रक जब्त किया है, जिसमें करीब 298 पेटी शराब मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, बरामद शराब की सटीक मात्रा और उससे संबंधित अन्य विवरणों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

 

शराब की खेप की सूचना पर गठित की गईं पुलिस टीमें

 

जानकारी के अनुसार, देवास पुलिस को सूचना मिली थी कि हरदा की ओर से अवैध शराब से भरा ट्रक गुजरने वाला है। बताया गया कि इस खेप को इंदौर के रास्ते गुजरात ले जाने की योजना थी। सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के निर्देशन में पांच से अधिक पुलिस टीमें गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

 

इस अभियान में कन्नौद, सतवास और खातेगांव क्षेत्र के पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल बताए गए। पुलिस संदिग्ध वाहन की तलाश कर रही थी। इसी दौरान हरदा-नेमावर हाईवे पर संबंधित ट्रक दिखाई दिया।

 

ट्रक रोकने के दौरान हुआ हादसा, टीआई की गई जान

 

प्रारंभिक विवरण के मुताबिक, संदिग्ध ट्रक का चालक रास्ते में पानी पीने के लिए रुका था। इसी दौरान खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी मौके पर पहुंचे और चालक को नीचे उतरने के लिए कहा।

 

बताया गया कि इसके बाद चालक और टीआई के बीच झूमाझटकी हुई। आरोप है कि चालक ने ट्रक आगे बढ़ा दिया, जिससे दिलीप पुरी नीचे गिर पड़े और वाहन का पिछला पहिया उनके ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल अधिकारी को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

 

घटना में चालक की भूमिका, घटनाक्रम और वाहन आगे बढ़ाने की परिस्थितियों का निर्धारण जांच के आधार पर किया जाना जरूरी है।

 

ट्रक से करीब 298 पेटी शराब जब्त, गुप्त चैंबर की चर्चा

 

पुलिस कार्रवाई से संबंधित जानकारी में जब्त ट्रक का पंजीकरण नंबर MP 43 H 4786 बताया गया है। वाहन से करीब 298 पेटी शराब बरामद होने का उल्लेख है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में बरामदगी की मात्रा अलग-अलग बताई गई है।

 

ट्रक में गुप्त चैंबर बनाकर शराब परिवहन किए जाने की बात भी सामने आई है। यदि इसकी पुष्टि होती है तो यह जांच का महत्वपूर्ण पहलू होगा कि वाहन में शराब छिपाने के लिए किस प्रकार की व्यवस्था की गई थी और इसका इस्तेमाल पहले भी किया गया था या नहीं।

 

इतनी बड़ी खेप की बरामदगी के बाद शराब के स्रोत, परिवहन व्यवस्था, संभावित खरीदारों और गंतव्य तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान जांच के अहम बिंदु हैं।

 

हरदा से खरगोन तक सामने आ रहे नाम, भूमिका की पुष्टि बाकी

 

मीडिया रिपोर्टों में शराब तस्करी से जुड़े मामले में हरदा के राहुल नामक व्यक्ति का उल्लेख किया गया है। ट्रक के खरगोन जिले में अकील कुरैली के नाम से पंजीकृत होने की जानकारी भी सामने आई है।

 

वाहन पर एच. सुरूर लिखे होने और इसे खरगोन के ट्रांसपोर्ट कारोबारी हबीब सुरूर से जोड़कर देखे जाने की बातें भी रिपोर्टों में कही गई हैं। हबीब सुरूर के निधन और उनके परिवार द्वारा परिवहन कारोबार संभाले जाने का भी उल्लेख किया गया है।

 

हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम सामने आना, वाहन का पंजीकरण या परिवहन व्यवसाय से जुड़ाव अपने आप में शराब तस्करी में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। संबंधित व्यक्तियों की भूमिका, संपर्कों और कथित नेटवर्क से संबंध की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।

 

दो महीने पहले मिली थी खातेगांव थाने की जिम्मेदारी

 

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिलीप पुरी वर्ष 2007 बैच के उप निरीक्षक बताए गए हैं। वे इंदौर के हीरानगर और चंदननगर थानों में भी पदस्थ रहे थे। खातेगांव थाने की जिम्मेदारी संभालने से पहले वे सतवास में पदस्थ थे। करीब दो महीने पहले ही उन्हें खातेगांव थाना प्रभारी बनाया गया था।

 

दिलीप पुरी धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र के बरमंडल गांव के निवासी बताए गए हैं। उनका परिवार इंदौर में रहता था। पोस्टमार्टम के बाद पार्थिव शरीर बरमंडल ले जाने और वहीं अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

 

आखिर कितना बड़ा है शराब तस्करी का नेटवर्क?

 

दिलीप पुरी की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराब की खेप कहां तैयार हुई, इसे किसने रवाना किया और इसके परिवहन की पूरी व्यवस्था किसके नियंत्रण में थी।

यदि शराब हरदा से इंदौर होते हुए गुजरात पहुंचाई जा रही थी, तो इस कथित मार्ग पर वाहन की आवाजाही, लोडिंग स्थल, परिवहन दस्तावेज, संचार रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच अहम हो सकती है। साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि ट्रक का इस्तेमाल केवल इसी खेप के लिए हुआ था या पहले भी ऐसे परिवहन किए गए थे।

 

मामले की गंभीरता केवल शराब की बरामदगी तक सीमित नहीं है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि अवैध कारोबार के पीछे कितने लोग सक्रिय थे, क्या अलग-अलग जिलों में इसकी कड़ियां जुड़ी थीं और क्या इस तरह की खेपों को सुरक्षित निकालने के लिए कोई संगठित व्यवस्था काम कर रही थी।

 

एक अधिकारी की मौत, अब निष्पक्ष जांच की चुनौती

 

ड्यूटी के दौरान दिलीप पुरी की मौत ने पुलिस विभाग और उनके परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है। इस घटना ने अवैध शराब के परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने रखा है।

 

अब जांच की कसौटी केवल जब्त वाहन और शराब की मात्रा नहीं होगी, बल्कि घटना की परिस्थितियों, जिम्मेदार लोगों और संभावित आपूर्ति नेटवर्क का तथ्यात्मक खुलासा भी होगा।

 

दिलीप पुरी की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और शराब तस्करी की कथित पूरी श्रृंखला तक पहुंचना जरूरी है, ताकि कानून के अनुसार जिम्मेदारी तय हो सके।

 

दण्डकारण्य दर्पण | सच के साथ, समाज के साथ।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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