CG: अर्नब के असर से बस्तर में जल प्रलय जैसे हालात, सातों जिलों में बारिश का कहर
इंद्रावती और शबरी समेत नदी नाले उफान पर, सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का खतरा, अबूझमाड़ में सड़क, बिजली और नेटवर्क व्यवस्था प्रभावित

अर्नब के असर से बस्तर में जल प्रलय जैसे हालात, सातों जिलों में बारिश का कहर
इंद्रावती और शबरी समेत नदी नाले उफान पर, सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का खतरा, अबूझमाड़ में सड़क, बिजली और नेटवर्क व्यवस्था प्रभावित
जगदलपुर। सितंबर के आखिरी दिनों में बस्तर संभाग पर बारिश ने ऐसा असर डाला है कि संभाग के सातों जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बंगाल की खाड़ी से बने गहरे अवदाब के प्रभाव से दक्षिण छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश हुई। मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई थी। इसी बारिश के बीच बस्तर की इंद्रावती, शबरी और कई छोटी-बड़ी नदियां उफान पर पहुंच गईं।
अबूझमाड़ में सबसे बड़ी चुनौती, सड़क संपर्क प्रभावित
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ में लगातार बारिश का असर सीधे आवागमन और संचार व्यवस्था पर पड़ा है। नारायणपुर-ओरछा मार्ग पर बड़गांव स्थित माड़ीन नदी का पुल पानी में डूब गया और पुल के ऊपर करीब पांच फीट पानी बहने की सूचना सामने आई। इसके कारण अबूझमाड़ और छोटेडोंगर क्षेत्र के दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ। कई इलाकों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क भी बाधित रहा।

स्थानीय स्तर पर अबूझमाड़ के बड़े हिस्से के सड़क संपर्क से कटने की बात कही जा रही है, लेकिन 80 प्रतिशत क्षेत्र सड़क कनेक्टिविटी से कट गया जैसे आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है। इसलिए इस आंकड़े को प्रकाशित करते समय संबंधित प्रशासनिक स्रोत की पुष्टि लेना जरूरी होगा।
बस्तर जिला: इंद्रावती ने बढ़ाई चिंता
बस्तर जिले में लगातार बारिश से इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। जगदलपुर में नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई और निचले इलाकों में पानी भरने लगा। नारायणपाल गांव में भी बाढ़ का खतरा सामने आया। जगदलपुर के लालबाग सहित कई निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों के बाधित होने की रिपोर्ट सामने आई। एनएच-30 और अन्य मार्गों पर भी बारिश और जलभराव का असर पड़ा।
सुकमा: शबरी नदी उफान पर, पंचायतों का संपर्क टूटा
सुकमा में लगातार बारिश से शबरी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। कोंटा क्षेत्र में शबरी नदी 40.68 मीटर तक पहुंची, जबकि चेतावनी स्तर 40.50 मीटर बताया गया है। झापरा पुल के ऊपर पानी आने के बाद यातायात रोकना पड़ा और 12 से अधिक पंचायतों का संपर्क प्रभावित हुआ। एर्राबोर और सुकमा-दोरनापाल मार्ग पर भी पानी भरने से आवाजाही प्रभावित रही।
बीजापुर: इंद्रावती और सड़क संपर्क पर असर
बीजापुर जिले में भी लगातार बारिश और इंद्रावती नदी के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ाई। एनएच-63 समेत कई मार्गों पर पानी और पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई। उपलब्ध रिपोर्टों में बीजापुर सहित बस्तर संभाग के कई जिलों में सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का खतरा बताया गया है।
दंतेवाड़ा: नदी-नालों के बढ़े जलस्तर से खतरा
दंतेवाड़ा में भी लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा और बाढ़ की आशंका बनी। जिले को उन क्षेत्रों में शामिल किया गया जहां भारी बारिश के कारण प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
कोंडागांव: सड़कें प्रभावित, बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
कोंडागांव जिले में लगातार दो दिनों की भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ। नदी-नाले उफान पर रहे और कई स्थानों पर तेज बहाव के कारण सड़क संपर्क बाधित हुआ। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। बारिश से जुड़ी एक घटना में मदानार गांव के 40 वर्षीय किसान की पानी में डूबने से मौत की सूचना भी सामने आई।
कांकेर: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी
कांकेर जिले में लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा और कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बनी। कलेक्टर ने कांकेर शहर और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत एवं सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और सतर्क रहने की सलाह दी गई।
सातों जिलों में प्रशासन अलर्ट
बस्तर संभाग के सातों जिलों में बारिश का असर देखते हुए प्रशासन ने निगरानी और राहत-बचाव व्यवस्था सक्रिय की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार संभाग में 50 से अधिक राहत शिविर बनाए गए और कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया। 300 से अधिक गांवों के बाढ़ से प्रभावित या संपर्क से कटने की रिपोर्ट सामने आई है, हालांकि यह आंकड़ा लगातार बदल सकता है।
भारी बारिश के कारण सड़क, रेल और हवाई संपर्क पर भी असर पड़ा। किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन के कुछ हिस्सों में भूस्खलन से ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं, जबकि खराब मौसम के कारण जगदलपुर से जुड़ी हवाई सेवा भी प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई।
अभी भी सावधानी जरूरी
बारिश का दौर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में नदी, नाले, पुल-पुलिया और जलभराव वाले रास्तों को पार करने से बचना जरूरी है। प्रशासन ने भी लोगों से अनावश्यक यात्रा नहीं करने और आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।
बस्तर की इस बारिश ने एक बार फिर यह दिखाया है कि दूरस्थ इलाकों में सड़क, पुल, बिजली और संचार व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। अब राहत के साथ सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों तक सुरक्षित पहुंच बहाल करना और नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।



