header ads
कला और संस्कृतिछत्तीसगढ़धर्मपरम्परागतपर्यावरणप्राचीनबस्तरशिक्षास्वास्थ्य

CG: विज्ञान जहां खत्म होता है, वहां शुरू होती है आस्था, पवित्र परंपरा से जुड़ी है मां लिंगेश्वरी की सदियों पुरानी कहानी

साल में केवल एक दिन खुलता है गुफा मंदिर का द्वार, दर्शन के लिए तीन दिन पहले से एक किलोमीटर लंबी कतार, संतान सुख की मनोकामना लेकर दूर दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु

संवाददाता – धनेन्द्र निषाद

कोंडागांव। बस्तर की धरती केवल घने जंगलों, पहाड़ों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन लोक परंपराओं और गहरी धार्मिक आस्था के लिए भी पहचानी जाती है। कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम आलोर झाटीबन की पहाड़ी गुफा में विराजमान मां लिंगेश्वरी का दरबार इसी आस्था और परंपरा की एक ऐसी कहानी अपने भीतर समेटे हुए है, जो पीढ़ियों से लोगों के विश्वास का हिस्सा बनी हुई है। वर्ष में केवल एक दिन खुलने वाले इस गुफा मंदिर के दर्शन के लिए इस बार तीन दिन पहले से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है और मंदिर के प्रवेश मार्ग से करीब एक किलोमीटर तक लंबी कतार लग चुकी है।

विज्ञान जहां अपनी सीमा तक पहुंचता है, वहां आस्था अपने विश्वास के साथ खड़ी रहती है

 

आज विज्ञान ने प्रकृति के अनेक रहस्यों को समझने की दिशा में बड़ी प्रगति की है, लेकिन भारतीय समाज में ऐसे अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल हैं, जहां प्रकृति, परंपरा और आस्था एक साथ दिखाई देती है। मां लिंगेश्वरी का गुफा मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए ऐसा ही स्थान है।

 

यहां आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन करने नहीं आते, बल्कि अपने साथ वर्षों पुराना विश्वास, मनोकामना और परिवार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। किसी के लिए यह माता का पवित्र दरबार है तो किसी के लिए अपनी संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का माध्यम।

 

वर्ष में एक दिन खुलता है गुफा का द्वार

 

मां लिंगेश्वरी के मंदिर की सबसे खास बात यह है कि गुफा का द्वार वर्ष में केवल एक निर्धारित दिन श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इस वर्ष 23 सितंबर को गुफा का द्वार खुलना है। द्वार खुलने से पहले ही आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है।

 

सोमवार शाम तक छत्तीसगढ़ के दुर्ग, बालोद, चारामा, कोंडागांव, बस्तर, केशकाल, सिहावा, रायपुर, कुरूद, कोयलीबेड़ा और भानपुरी सहित कई क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंच चुके थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड, हरियाणा और मुंबई सहित अन्य राज्यों से भी भक्त मां लिंगेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचे हैं।

 

एक किलोमीटर लंबी कतार में इंतजार

 

मंदिर के प्रवेश मार्ग से करीब एक किलोमीटर तक श्रद्धालुओं की कतार लगी हुई है। दूरदराज से आए कई श्रद्धालु चटाई बिछाकर गुफा का द्वार खुलने का इंतजार कर रहे हैं। कई परिवार रात से ही अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

 

श्रद्धालुओं का कहना है कि वे बुधवार सुबह गुफा का द्वार खुलते ही मां लिंगेश्वरी के दर्शन करना चाहते हैं। लंबे इंतजार के बावजूद उनके चेहरे पर थकान से ज्यादा उत्साह और आस्था दिखाई दे रही है।

 

संतान सुख की मनोकामना लेकर पहुंचते हैं दंपती

 

मां लिंगेश्वरी के दरबार से जुड़ी सबसे प्रमुख लोकमान्यताओं में संतान प्राप्ति की मनोकामना भी शामिल है। इसी विश्वास के साथ देश के अलग अलग हिस्सों से दंपती यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर माता के दरबार में प्रार्थना करते हैं और इसे अपनी आस्था का विषय मानते हैं।

 

उत्तर प्रदेश के सीतापुर निवासी बालक राम राज अपनी पत्नी के साथ पहली बार मां लिंगेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। इसी तरह हरियाणा के हरपाल सिंह और मुंबई के श्रीकांत चौधरी भी अपनी पत्नियों के साथ यहां पहुंचे हैं। इन श्रद्धालुओं ने बताया कि वे संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर माता के दरबार में आए हैं और गुफा का द्वार खुलने पर मां से आशीर्वाद मांगेंगे।

 

पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा बनी आस्था की पहचान

 

मां लिंगेश्वरी का यह स्थान केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि बस्तर की लोक संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं की पहचान भी है। पहाड़ी की प्राकृतिक गुफा, जंगलों से घिरा वातावरण और वर्ष में एक दिन दर्शन की परंपरा इस स्थान को अलग पहचान देती है।

 

स्थानीय लोकविश्वास में मां लिंगेश्वरी को लेकर अनेक मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं मान्यताओं के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। आस्था की यह परंपरा किसी एक परिवार या एक पीढ़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि बुजुर्गों से बच्चों तक और फिर नई पीढ़ी तक आगे बढ़ती चली आ रही है।

 

प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए की व्यवस्थाएं

 

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति और जिला प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग, पेयजल और स्वास्थ्य सेवा सहित आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की तैयारी भी की जा रही है।

 

23 सितंबर को जब गुफा का द्वार खुलेगा तो हजारों श्रद्धालुओं की निगाहें मां लिंगेश्वरी के दर्शन पर टिकी होंगी। किसी के हाथ में पूजा की थाली होगी, किसी के मन में परिवार की खुशहाली की प्रार्थना और किसी के हृदय में संतान सुख की कामना।

 

मां लिंगेश्वरी की यह कहानी केवल एक मंदिर की कहानी नहीं है। यह बस्तर की उस जीवंत संस्कृति की कहानी है, जहां पहाड़, जंगल, प्रकृति, लोकविश्वास और परंपरा मिलकर आस्था का संसार रचते हैं। विज्ञान अपनी जगह है और आस्था अपनी जगह, लेकिन सदियों से चली आ रही ऐसी परंपराएं यह बताती हैं कि मनुष्य के जीवन में विश्वास और संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं। यही विश्वास हर वर्ष हजारों कदमों को मां लिंगेश्वरी की पवित्र गुफा तक खींच लाता है।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!