
छोटेडोंगर अस्पताल के बाहर प्लास्टिक कचरे से जाम नाली, संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा
छोटेडोंगर, नारायणपुर
संवाददाता -बोधन नाग
स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच छोटेडोंगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने स्थित नाली प्लास्टिक की बोतलों, डिब्बों और अन्य कचरे से पूरी तरह जाम हो गई है। नाली में गंदा पानी जमा होने से आसपास बदबू फैल रही है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसका असर अस्पताल में भर्ती मरीजों, उनके परिजनों और कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नाली में बड़ी संख्या में प्लास्टिक की बोतलें और अन्य गैर-अगलनीय कचरा जमा है, जिससे पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है। लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण नाली से उठने वाली दुर्गंध अस्पताल परिसर तक फैल रही है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि अस्पताल परिसर के सामने इतनी मात्रा में प्लास्टिक कचरा आखिर पहुंचा कैसे और इसकी नियमित सफाई क्यों नहीं की जा रही।
अस्पताल में उपचार के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि कई महीनों से यही स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि रात के समय मच्छरों का प्रकोप इतना बढ़ जाता है कि चैन से सोना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक रुका हुआ गंदा पानी मच्छरों, मक्खियों और बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। इससे डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और हैजा जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर के आसपास ऐसी स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानी जाती है।
अस्पताल परिसर और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखना अस्पताल प्रबंधन, ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद मुख्य द्वार के सामने जाम नाली और फैली गंदगी व्यवस्था की लापरवाही को उजागर कर रही है।
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल नाली की सफाई कराए, प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान सुनिश्चित करे तथा भविष्य में अस्पताल परिसर के आसपास कचरा फेंकने पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह समस्या बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है।





