
रोजगार और वन संरक्षण का अभिनव मॉडल बना नारायणपुर, अवैध कटाई और अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण
नारायणपुर। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वनमण्डल नारायणपुर के असीमांकित वन क्षेत्रों में स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं को ‘वन मित्र’ के रूप में नियुक्त कर वनों की सुरक्षा को नई मजबूती दी गई है। इस पहल से जहां स्थानीय युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिला है, वहीं अबुझमाड़ के संवेदनशील वन क्षेत्रों में अवैध कटाई, अवैध उत्खनन, अवैध परिवहन तथा अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वनों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्थानीय समाज की भागीदारी से ही इसे स्थायी रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। इसी सोच के साथ अबुझमाड़ के युवाओं को वन संरक्षण अभियान का सहभागी बनाया गया है। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं और वन संपदा की सुरक्षा भी अधिक प्रभावी हुई है।
नारायणपुर जिले के असीमांकित वन क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल प्रभावित होने के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे थे। 31 मार्च 2026 के बाद क्षेत्र में सामान्य स्थिति बनने और लोगों की आवाजाही बढ़ने के साथ कुछ स्थानों पर अवैध कटाई तथा पेंदा खेती के लिए वन भूमि पर दबाव बढ़ने लगा। इस चुनौती को देखते हुए वन विभाग ने स्थानीय युवाओं को ‘वन मित्र’ के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया।
वर्तमान में लोडागोटा, कुड़मेल, करांगुर, धोबे, कुतुल, फरसबेड़ा, पदमकोट, कोड़ेनार, नेलांगुर, नेड़नार, कस्तुरमेटा, मोहंदी, कच्चापाल, ईरकभट्टी, बेचा, सरगीपाल, गोंगला, छिंदपदर, होरादि, बिनागुण्डा और छिंदपुर सहित विभिन्न ग्रामों के 29 स्थानीय युवाओं को वन मित्र के रूप में नियुक्त किया गया है। इन्हें लगभग 2 लाख 69 हजार 681 हेक्टेयर असीमांकित वन क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वन विभाग द्वारा वन मित्रों को नियमित प्रशिक्षण देकर वन संरक्षण, अवैध गतिविधियों की रोकथाम तथा जनजागरूकता से संबंधित विषयों पर दक्ष बनाया जा रहा है। प्रशिक्षित वन मित्र लगातार अपने क्षेत्रों का भ्रमण कर ग्रामीणों को बैठकों एवं मुनादी के माध्यम से वन संरक्षण, अवैध कटाई रोकने और लघु वनोपज के सतत संग्रहण के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
वन मित्रों को छह दलों में विभाजित कर प्रस्तावित नवीन असीमांकित परिक्षेत्र बेडमाकोटि, परियादी, कोहकामेटा, ओरछा, होरादि एवं आकाबेड़ा में तैनात किया गया है। प्रत्येक दल अपने क्षेत्र में नियमित निगरानी कर अवैध कटाई, अवैध परिवहन, अवैध उत्खनन और अतिक्रमण की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि स्थानीय युवाओं की सहभागिता से वन संरक्षण का यह मॉडल भविष्य में प्रदेश के अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, जनभागीदारी और रोजगार सृजन—तीनों उद्देश्यों को एक साथ पूरा करते हुए अबुझमाड़ में विकास और संरक्षण का नया अध्याय लिख रही है।




