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CG News: नितारा : नारायणपुर प्रशासन एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के सहयोग से “चंदा के चकोर” नाटक का भव्य मंचन

नितारा : नारायणपुर प्रशासन एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के सहयोग से “चंदा के चकोर” नाटक का भव्य मंचन

 

सिनेमा हॉल में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक बदलाव की दिखी जीवंत झलक

गांव के विकास से लेकर विधान सभा तक की यात्रा को कलाकारों ने मंच पर उतारा

 

नक्सल पुनर्वासित युवा-युवतियों एवं स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा

 

नारायणपुर, 21 मई 2026// जिला प्रशासन नारायणपुर एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “नितारा” (नारायणपुर इंस्टीट्यूट ऑफ ट्राइबल एंड रूरल आर्ट) थिएटर कार्यशाला के अंतर्गत एजी सिनेमा हॉल, नारायणपुर में “चंदा के चकोर” नाटक का भव्य मंचन किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, परंपरा, लोकजीवन एवं गांव के विकास से लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसद तक की यात्रा को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया।

 

कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि जनजातीय, दूरस्थ एवं नक्सल पुनर्वासित युवा-युवतियों के समग्र विकास, सांस्कृतिक सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सहयोग से 30 दिवसीय प्रस्तुति आधारित थिएटर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसी कार्यशाला के अंतर्गत 20 मई को “चंदा के चकोर” नाटक का मंचन किया गया।

 

नाटक की कहानी अबूझमाड़ के एक अविकसित गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित रही, जिसकी शुरुआत चंदा और चकोर की कहानी से होती है। प्रस्तुति में आदिवासी देवी-देवताओं की आस्था, शादी-विवाह की परंपराएं, मेला-मड़ई, पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, रहन-सहन एवं जनजातीय संस्कृति का जीवंत चित्रण किया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा, गांव के विकास एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्ता को भी प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।

 

नाटक का मंचन नक्सल पुनर्वासित युवा-युवतियों एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के अंत में जिला पंचायत अध्यक्ष ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि “चंदा के चकोर” जैसी प्रस्तुतियां न केवल जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने का कार्य करती हैं, बल्कि गांवों में सामाजिक जागरूकता एवं सकारात्मक बदलाव का संदेश भी देती हैं। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

 

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम ने नाटक में भाग लेने वाले आत्मसमर्पित युवा-युवतियों एवं कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि कला और संस्कृति समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

 

कार्यक्रम में “चंदा के चकोर” नाटक के निर्देशक हीरा मानिकपुरी, लोक गायिका गरिमा दिवाकर, पार्षद संजय नदी, रमशिला नाग, जिला पंचायत सदस्य संतनाथ उसेंडी, अपर कलेक्टर बीरेंद्र बहादुर पंचभाई, एसडीएम अभयजीत मंडावी, जनपद सीईओ सुनील सोनपिपरे, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास डॉ. राजेंद्र सिंह सहित जिला स्तरीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित थे।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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