
ASI पर UPI से वसूली के आरोप, पहले निलंबन फिर बहाली; अब कार्रवाई की फाइल कहां अटकी?
सिम्स चौकी में पीएम कराने के नाम पर 20 हजार रुपये लेने का आरोप, मस्तूरी में पोस्टिंग के दौरान भी आई शिकायत; जांच रिपोर्ट पर निर्णय को लेकर उठ रहे सवाल
बिलासपुर। पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की बातों के बीच बिलासपुर में एएसआइ ढोलाराम मरकाम से जुड़ा कथित वसूली प्रकरण एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सिम्स चौकी में पदस्थापना के दौरान पोस्टमार्टम कराने के नाम पर यूपीआई के माध्यम से पैसे लेने के आरोप लगे थे। शिकायत सामने आने के बाद तत्कालीन कार्रवाई में उन्हें निलंबित किया गया, लेकिन कुछ समय बाद बहाली कर मस्तूरी थाने में पदस्थ किया गया। वहां भी वसूली की शिकायत सामने आने के बाद उन्हें लाइन अटैच किए जाने की जानकारी है।
अब इस मामले में विभागीय जांच रिपोर्ट आईजी कार्यालय भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, रिपोर्ट पर क्या निर्णय हुआ और अंतिम कार्रवाई की वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
पोस्टमार्टम कराने के नाम पर 20 हजार रुपये लेने का आरोप
जानकारी के अनुसार, नवंबर 2025 में एएसआइ ढोलाराम मरकाम सिम्स चौकी में चौकी प्रभारी के रूप में पदस्थ थे। इसी दौरान उन पर पोस्टमार्टम कराने के नाम पर कथित वसूली के गंभीर आरोप लगे।
लोरमी क्षेत्र में रहने वाले एक युवक ने शिकायत में आरोप लगाया था कि अपने स्वजन का पोस्टमार्टम जल्दी कराने के लिए 20 हजार रुपये मांगे गए। आरोप के मुताबिक, यह राशि साइकिल स्टैंड संचालक के यूपीआई के माध्यम से ली गई थी।
इस मामले में शिकायत सामने आने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
500 रुपये के लिए शव नहीं देने का भी आरोप
इसी दौरान कोटा क्षेत्र के रिगरिगा निवासी एक युवक ने भी एएसआइ पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायत में पिता के शव को 500 रुपये के लिए नहीं देने का आरोप लगाया गया था।
लगातार शिकायतें सामने आने के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने एएसआइ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की थी। यह मामला पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और आम लोगों के साथ व्यवहार को लेकर चर्चा में आया।
निलंबन के बाद बहाली, मस्तूरी में मिली पोस्टिंग
प्रकरण में निलंबन के कुछ समय बाद एएसआइ की बहाली कर उन्हें मस्तूरी थाने में पदस्थ किए जाने की जानकारी सामने आई।
इसी पदस्थापना के दौरान मुर्गी फार्म संचालक से भी कथित वसूली की शिकायत मिलने की बात कही गई। इसके बाद एएसआइ को लाइन अटैच किया गया।
एक ही पुलिसकर्मी के खिलाफ अलग-अलग समय पर शिकायतें सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई और शिकायतों के निपटारे को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जांच रिपोर्ट आईजी कार्यालय भेजी गई, आगे क्या हुआ?
यूपीआई के माध्यम से कथित वसूली के मामले में जांच के बाद एसएसपी रजनेश सिंह द्वारा कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट आईजी कार्यालय भेजे जाने की जानकारी है।
लेकिन रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय हुआ है या नहीं, संबंधित अधिकारी स्तर पर क्या कार्रवाई प्रस्तावित है और प्रक्रिया किस चरण में है, इसे लेकर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
ऐसे में सवाल उठता है कि गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है? क्या विभागीय जांच अभी लंबित है या रिपोर्ट पर निर्णय लिया जा चुका है?
जवाबदेही तय होना जरूरी
पुलिस व्यवस्था में आम नागरिकों का भरोसा पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध कार्रवाई पर टिका होता है। खासकर पोस्टमार्टम जैसी संवेदनशील परिस्थिति में परिजनों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, यह प्रशासनिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस प्रकरण में शिकायतकर्ताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच, उपलब्ध डिजिटल भुगतान साक्ष्यों का परीक्षण और विभागीय प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध विवरणों के आधार पर एएसआइ के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता। संबंधित अधिकारी का पक्ष और विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आना आवश्यक है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच रिपोर्ट पर विभाग क्या निर्णय लेता है और कथित वसूली के इस मामले में जवाबदेही कब तय होती है।




