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पदोन्नति के बाद नवीन पदस्थापना पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय सबद्रा को विदाई, कभी अधिकारियों के उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान में शामिल होते थे शहर के वरिष्ठ नागरिक, पत्रकार और जनप्रतिनिधि

नारायणपुर में विदाई समारोह के साथ उठे परंपरा के सवाल, क्या फिर लौटेगा वरिष्ठ नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के सम्मान का दौर?

नारायणपुर में विदाई समारोह के साथ उठे परंपरा के सवाल, क्या फिर लौटेगा वरिष्ठ नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के सम्मान का दौर?

 

पदोन्नति के बाद नवीन पदस्थापना पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय सबद्रा को विदाई, कभी अधिकारियों के उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान में शामिल होते थे शहर के वरिष्ठ नागरिक, पत्रकार और जनप्रतिनिधि

नारायणपुर। जिले में शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण, पदोन्नति तथा नवीन पदस्थापना के अवसर केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके कार्यकाल और जनसेवा में योगदान को याद करने का भी अवसर होते हैं। नारायणपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय सबद्रा की पदोन्नति के बाद नवीन पदस्थापना पर आयोजित विदाई समारोह के बीच शहर की एक पुरानी परंपरा भी चर्चा का विषय बनती है। कुछ वर्ष पहले तक ऐसे अवसरों पर शहर के वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता को भी महत्व दिया जाता था। समय के साथ यह परंपरा कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

पदोन्नति के बाद पुलिस मुख्यालय में नई जिम्मेदारी

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय सबद्रा की पदोन्नति के उपरांत पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक, योजना एवं प्रबंधन के पद पर नवीन पदस्थापना हुई है। इस अवसर पर 15 अक्टूबर 2026 को नारायणपुर पुलिस परिवार की ओर से उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल सहित राजपत्रित अधिकारी, विभिन्न शाखाओं के प्रभारी और कार्यालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके साथ कार्य करने के अनुभव साझा किए तथा उनके कार्यकाल से जुड़ी स्मृतियों को याद किया। साथियों ने उनकी पदोन्नति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं।

नारायणपुर पुलिस परिवार द्वारा अक्षय सबद्रा को पदोन्नति के बाद नवीन पदस्थापना पर विदाई
नारायणपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय सबद्रा का विदाई समारोह

 

पुलिस ऑफिसर्स मेस में जुटे जिले के वरिष्ठ अधिकारी

सायंकाल पुलिस ऑफिसर्स मेस में आयोजित विदाई समारोह में कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऐश्वर्य चंद्राकर, आईटीबीपी एवं बीएसएफ के अधिकारी, जिले के राजपत्रित अधिकारी तथा दोनों रक्षित निरीक्षक उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान अधिकारियों ने अक्षय सबद्रा के साथ बिताए कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उनके प्रशासनिक सहयोग और विभागीय दायित्वों के निर्वहन से जुड़ी स्मृतियों को याद किया गया। पुलिस परिवार की ओर से उन्हें स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य, अच्छे स्वास्थ्य और नवीन पदस्थापना में सफलता की कामना की गई।

कभी सार्वजनिक सहभागिता से बढ़ता था सम्मान का महत्व

नारायणपुर में कुछ वर्षों पहले तक अधिकारियों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना और विदाई जैसे अवसरों पर शहर के वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों तथा जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी को भी विशेष महत्व दिया जाता था। ऐसी सहभागिता से प्रशासन और समाज के बीच संवाद को मजबूती मिलती थी। अधिकारियों के कार्यों को केवल विभागीय उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि जनहित और स्थानीय विकास से जोड़कर देखने का अवसर भी मिलता था।

हालांकि, समय के साथ इस तरह की परंपरा कमजोर पड़ने की चर्चा है। अब ऐसे आयोजन अधिकतर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित दिखाई देते हैं। यह बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था पर कोई आरोप नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में नागरिक सहभागिता की भूमिका पर विचार करने का अवसर है।

प्रशासन और समाज के बीच संवाद मजबूत करने की जरूरत

लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और समाज के वरिष्ठ नागरिकों के बीच संवाद महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिकारियों के अच्छे कार्यों की सार्वजनिक सराहना से सकारात्मक कार्यसंस्कृति को प्रोत्साहन मिलता है और आम नागरिकों को भी प्रशासनिक उपलब्धियों से जुड़ने का अवसर मिलता है।

नारायणपुर जैसे जिले में, जहां स्थानीय समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों में प्रशासन तथा समाज के समन्वय की अहम भूमिका है, ऐसे अवसरों पर व्यापक नागरिक सहभागिता उपयोगी हो सकती है। सम्मान और विदाई के कार्यक्रमों में वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों तथा जनप्रतिनिधियों को उचित स्थान देने की परंपरा को फिर से प्रोत्साहित किया जाए, तो यह प्रशासन और समाज के बीच विश्वास बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक पहल हो सकती है।

अक्षय सबद्रा को दी गई विदाई उनके सेवाकाल के एक महत्वपूर्ण पड़ाव का अवसर है। साथ ही, यह अवसर इस बात पर विचार करने का भी है कि नारायणपुर में सार्वजनिक सम्मान और सामाजिक सहभागिता की पुरानी परंपराओं को किस तरह फिर से जीवंत किया जा सकता है।

दंडकारण्य दर्पण | सच के साथ, समाज के साथ

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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