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विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा का नेवता लेकर छोटेडोंगर पहुंचे समिति के सदस्य, मां दंतेश्वरी सहित देवी-देवताओं को दिया आमंत्रण

84 परगना छोटेडोंगर में निभाई गई पारंपरिक नेवता रस्म, तिलक-चंदन लगाकर दशहरा समिति के सदस्यों का किया गया स्वागत

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा का नेवता लेकर छोटेडोंगर पहुंचे समिति के सदस्य, मां दंतेश्वरी सहित देवी-देवताओं को दिया आमंत्रण

 

84 परगना छोटेडोंगर में निभाई गई पारंपरिक नेवता रस्म, तिलक-चंदन लगाकर दशहरा समिति के सदस्यों का किया गया स्वागत

 

रिपोर्टर: बोधन नाग

 

नारायणपुर/छोटेडोंगर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की पारंपरिक धार्मिक रस्मों के तहत जगदलपुर से दशहरा समिति के सदस्य नेवता लेकर 84 परगना छोटेडोंगर पहुंचे। यहां मां दंतेश्वरी मंदिर में विधि-विधान के साथ छोटेडोंगर की माई जी सहित क्षेत्र के देवी-देवताओं को बस्तर दशहरा पर्व में शामिल होने का पारंपरिक आमंत्रण दिया गया।

छोटेडोंगर में मां दंतेश्वरी मंदिर में बस्तर दशहरा का नेवता देने पहुंचे समिति के सदस्य
84 परगना छोटेडोंगर में मां दंतेश्वरी सहित क्षेत्र के देवी-देवताओं को बस्तर दशहरा पर्व का आमंत्रण देते दशहरा समिति के सदस्य।

मां दंतेश्वरी मंदिर में निभाई गई नेवता की परंपरा

 

बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं और सामूहिक आस्था का प्रतीक है। इस पर्व की विशेषता यह है कि इसकी परंपराओं में क्षेत्र के देवी-देवताओं को विशेष सम्मान दिया जाता है। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए दशहरा समिति के सदस्य छोटेडोंगर पहुंचे और स्थानीय देवी-देवताओं को पर्व में शामिल होने का नेवता दिया।

 

पारंपरिक तरीके से किया गया स्वागत

 

छोटेडोंगर पहुंचने पर दशहरा समिति के सदस्यों का तिलक-चंदन लगाकर पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया। इस दौरान धार्मिक आस्था और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। देवी-देवताओं को आमंत्रित करने की यह रस्म बस्तर दशहरा के विशिष्ट स्वरूप और क्षेत्रीय परंपराओं के आपसी जुड़ाव को दर्शाती है।

 

बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है दशहरा

 

बस्तर दशहरा देश के विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजनों में गिना जाता है। इसकी पहचान यहां की प्राचीन परंपराओं, देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा और जनजातीय समाज की सांस्कृतिक भागीदारी से है। दशहरा पर्व के लिए विभिन्न क्षेत्रों में जाकर देवी-देवताओं को नेवता देने की परंपरा इस आयोजन को विशिष्ट बनाती है।

 

84 परगना छोटेडोंगर में नेवता देने का यह कार्यक्रम भी इसी सांस्कृतिक परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी रहा। ऐसी परंपराएं बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

पुजारी और ग्रामीण रहे मौजूद

 

इस अवसर पर 84 परगना छोटेडोंगर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी लिखराम बेलसरिया, युधिष्ठिर मांझी, ग्राम पटेल सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्र की धार्मिक आस्था और बस्तर दशहरा के साथ जुड़े पारंपरिक संबंधों की झलक सामने आई।

 

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Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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