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नारायणपुर में गूंजा गायता जोहारनी का जयघोष, हजारों आदिवासियों ने निभाई परंपरा

7 परगना से जुटे समाजजन, बस्तर सांसद महेश कश्यप समेत समाज प्रमुखों की रही गरिमामयी मौजूदगी

नारायणपुर में गूंजा गायता जोहारनी का जयघोष, हजारों आदिवासियों ने निभाई परंपरा

 

7 परगना से जुटे समाजजन, बस्तर सांसद महेश कश्यप समेत समाज प्रमुखों की रही गरिमामयी मौजूदगी

 

नारायणपुर। गोंडवाना समाज जिला नारायणपुर की ओर से बखरूपारा स्थित सामाजिक परिसर में जिलास्तरीय गायता जोहारनी कार्यक्रम का भव्य आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक आस्था के साथ किया गया। जिले के विभिन्न परगनाओं से पहुंचे हजारों आदिवासी समाजजनों ने अपने पारंपरिक मार्गदर्शक गायता के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करते हुए सामूहिक रूप से जोहार किया।

नारायणपुर गायता जोहारनी कार्यक्रम में शामिल आदिवासी समाजजन और अतिथि
बखरूपारा में आयोजित जिलास्तरीय गायता जोहारनी कार्यक्रम में मौजूद समाज प्रमुख और समाजजन।

कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी परंपरा के अनुरूप देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और सेवा-अर्जी के साथ हुई। सामाजिक परिसर में पूरे दिन पारंपरिक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकजुटता का वातावरण बना रहा।

 

बस्तर सांसद महेश कश्यप सहित समाज प्रमुख हुए शामिल

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में संरक्षण एवं लघु वनोपज से जुड़े प्रदेश अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, सर्व आदिवासी समाज जिलाध्यक्ष सदाराम ठाकुर शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता गोंडवाना समाज जिला नारायणपुर के अध्यक्ष रजऊ उसेंडी ने की।

 

आदिवासी परंपरा के अनुरूप अतिथियों का तिलक लगाकर, पगड़ी पहनाकर और पारंपरिक गमछा भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।

 

नवाखाई के बाद निभाई जाती है गायता जोहारनी की परंपरा

 

गोंडवाना समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में गायता को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। गायता समाज के धार्मिक, सामाजिक और पारंपरिक मार्गदर्शक माने जाते हैं।

 

परंपरा के अनुसार खेतों में नई फसल तैयार होने के बाद नवाखाई के माध्यम से नए अन्न का सामूहिक रूप से सम्मान किया जाता है। इसके बाद गायता जोहारनी की परंपरा निभाई जाती है। इसी परंपरा के तहत नारायणपुर जिले के विभिन्न परगनाओं से समाजजन बखरूपारा पहुंचे और अपने-अपने गायता के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की।

 

सामाजिक एकजुटता और अधिकारों पर हुआ विचार-विमर्श

 

कार्यक्रम केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान समाज के प्रबुद्धजनों, ग्रामीणों और सामाजिक पदाधिकारियों ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों, आर्थिक चुनौतियों, समाज के अधिकारों और भविष्य की दिशा को लेकर विचार-विमर्श किया।

 

समाज के समग्र विकास, सामाजिक एकता और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़कर रखने पर भी चर्चा हुई।

 

मांदर की थाप पर थिरका परिसर, बच्चों ने प्रस्तुत किया घोटुल पाटा

 

गायता जोहारनी कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। मांदर की थाप के साथ पारंपरिक रेला और हुलकी नृत्य ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। वहीं नन्हे-मुन्ने बच्चों की घोटुल पाटा प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

 

पारंपरिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में पहुंचे लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया। आयोजन के दौरान आदिवासी समाज की परंपरा, कला और सामूहिक जीवन शैली की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

 

नए अन्न से बने चिवड़ा और गुड़ का प्रसाद बांटा गया

 

कार्यक्रम में दूर-दराज से पहुंचे समाजजनों और अतिथियों के लिए नए अन्न से तैयार पारंपरिक चिवड़ा और गुड़ का प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद वितरण के माध्यम से सामाजिक भाईचारे और सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया गया।

 

बड़ी संख्या में समाज प्रमुख और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

 

कार्यक्रम में सर्व समाज एवं गोंडवाना समाज के पदाधिकारी, परगना माझी, परगना अध्यक्ष, गायता, पटेल, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।

 

इस दौरान नगरपालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल, जनपद अध्यक्ष पिंकी उसेंडी, मोड़ा राम कवड़ो, जागेश्वर उसेंडी, मोती राम वड्डे, राजमन मंडावी, साधूराम पोटाई, रतन सलाम, रामसिंह मंडावी, मंगऊ राम कावड़े, हरेकृष्ण गार्डी, नरेश पट्टावी, फगनू सलाम, संतनाथ उसेंडी, प्रेमलाल नाग, राजू राम दुग्गा, लखन मंडावी, लछु करंगा, चैतराम कुमेटी, राकेश कावड़े, परमेश उईके, सोनसिंग कोर्राम, पुलधर कचलाम, लखन नुरेटी, सुकमू करंगा, बुधराम वड्डे, सुंदर नाग, कमलेश नाग, गोपाल दुग्गा, प्रभुलाल दुग्गा, सुखमन कचलाम, सुखमन उइके, राकेश उसेंडी, मंगतू पोटाई, रत्ती कोर्राम, जयराम गावड़े, जयलाल, सोमधर मंडावी, जयराम कोरोम, जंगलूराम सलाम, सुकलु, लखमु हिचामी, जयलाल मंडावी, सिंगलु दुग्गा, लच्छूराम दुग्गा, सुखमन कोर्राम, उमेश कर्मा, तिजाय कुमेटी, अनिता कोरेटी, सविता उसेंडी, देवली पोटाई, संतोषी कुमेटी, संगीता ध्रुव, कोता गार्डी, मंगली कावड़े, रानो पोटाई, नमिता कुमेटी, सुनिता कोड़ो, सतन्ती उसेंडी, रेखा सलाम, अनूप कुमेटी, तिजाउ कावड़े, सुधराम उसेंडी, राजा कुमेटी, मीना भास्कर, सुखयारी सलाम, देवी कुमेटी और रामदाय सलाम सहित बड़ी संख्या में सामाजिक जन उपस्थित रहे।

 

गायता जोहारनी के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आधुनिक बदलावों के बीच भी नारायणपुर का आदिवासी समाज अपनी पारंपरिक मान्यताओं, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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