CG: नारायणपुर के चेंदरू मंडावी के नाम पर शुरू हुआ राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार, मिलेगा एक लाख रुपये का सम्मान
गढ़बेंगाल के चेंदरू और बाघ टेम्बू की ऐतिहासिक कहानी से जुड़ा है पुरस्कार, ग्रामीण पर्यटन में उल्लेखनीय काम करने वाले व्यक्ति या संस्था को मिलेगा सम्मान। � ibc24.in +1
नारायणपुर के चेंदरू मंडावी के नाम पर शुरू हुआ राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार, हर साल मिलेगा एक लाख रुपये का सम्मान
गांव की संस्कृति, जनजातीय परंपरा और प्राकृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने वाले व्यक्ति या संस्था को मिलेगा चेंदरू पुरस्कार, 10 अक्टूबर तक भेजी जा सकती हैं प्रविष्टियां
रायपुर।

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों की संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक विरासत और स्थानीय जीवनशैली को देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने चेंदरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार शुरू किया है। इस पुरस्कार के माध्यम से ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय और प्रभावी काम करने वाले व्यक्ति अथवा संस्था को सम्मानित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अनुसार पुरस्कार के लिए चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान प्रत्येक वर्ष राज्योत्सव एवं राज्य स्थापना दिवस अलंकरण समारोह के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।
चेंदरू मंडावी की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा है पुरस्कार
इस पुरस्कार का नाम नारायणपुर जिले के गढ़बेंगाल गांव से जुड़े चेंदरू मंडावी के नाम पर रखा गया है। चेंदरू और बाघ टेम्बू की दोस्ती की कहानी बस्तर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची थी। स्वीडन के फिल्म निर्देशक अर्ने सक्सडॉर्फ इस कहानी से प्रभावित हुए और वर्ष 1957 में चेंदरू और बाघ की दोस्ती पर आधारित फिल्म बनाई। उस समय करीब 10 वर्ष के चेंदरू ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी।
चेंदरू मंडावी की यह पहचान बस्तर की प्रकृति, वन्यजीवन और आदिवासी जीवनशैली के साथ जुड़ी रही। इसी विरासत को ग्रामीण पर्यटन के विकास से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने उनके नाम पर यह पुरस्कार स्थापित किया है।
ग्रामीण पर्यटन को रोजगार और आजीविका से जोड़ने की पहल
राज्य सरकार का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका का माध्यम बनाना है। इसके अंतर्गत होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोक संस्कृति, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत तथा समुदाय आधारित पर्यटन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
पुरस्कार के लिए ग्रामीण पर्यटन से जुड़े कार्यों का मूल्यांकन छह प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा। इनमें एथनिक पर्यटन, इको पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, हेरिटेज पर्यटन, एडवेंचर पर्यटन तथा मेडिकल एवं वेलनेस पर्यटन शामिल हैं।
स्थानीय लोगों की भागीदारी को मिलेगा महत्व
चयन प्रक्रिया में पर्यटन गतिविधियों के साथ होमस्टे विकास, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, पर्यटकों को उपलब्ध कराए जा रहे विशिष्ट अनुभव, पर्यटन स्थलों के संरक्षण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी महत्व दिया जाएगा। संबंधित क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में हुए बदलाव तथा पूर्व और वर्तमान में किए गए कार्यों का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
10 अक्टूबर तक भेजी जा सकती हैं प्रविष्टियां
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में कार्यरत पात्र व्यक्ति या संस्था इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकती है। आवेदन के साथ परिचय, पता, फोटोग्राफ, स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र, आधार कार्ड की सत्यापित प्रति, ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण, प्राप्त अन्य सम्मान तथा प्रकाशित सामग्री की जानकारी प्रस्तुत की जा सकती है।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अनुसार निर्धारित प्रारूप में आवेदन 10 अक्टूबर 2026 तक प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, द्वितीय तल, उद्योग भवन, रिंग रोड नंबर 1, रायपुर में पंजीकृत डाक से पहुंचना आवश्यक है।
चयन के लिए जूरी द्वारा प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण किया जाएगा। चयनित व्यक्ति या संस्था को राज्योत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा।
बस्तर के गौरव से ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान
चेंदरू मंडावी के नाम से शुरू किया गया यह पुरस्कार बस्तर की उस कहानी को भी सामने लाता है, जिसमें आदिवासी जीवन, जंगल, वन्यजीवन और स्थानीय संस्कृति ने अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की थी। अब इसी विरासत को ग्रामीण पर्यटन, रोजगार और स्थानीय विकास से जोड़ने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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