header ads
अधिकारकृषिछत्तीसगढ़टैकनोलजीनारायणपुरपर्यावरणबस्तररोजगारस्वास्थ्य

कुदरत की दोहरी मार से टूट रहे किसान: पहले बाढ़ ने छीनी फसल, अब बेमौसम बारिश से कर्ज चुकाने की चिंता

छोटेडोंगर में बेमौसम बारिश से धान की फसल पर खतरा, किसान चिंतित

 

 

रिपोर्टर – बोधन नाग

नारायणपुर- छोटेडोंगर क्षेत्र में बदलते मौसम और बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल पर अब नुकसान का खतरा मंडराने लगा है। पहले ही बाढ़ की वजह से कई किसानों की फसल प्रभावित हो चुकी थी। ऐसे में अब एक बार फिर बारिश ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिरने की आशंका पैदा कर दी है।

छोटेडोंगर क्षेत्र में बेमौसम बारिश के बीच धान की फसल
छोटेडोंगर में धान की फसल पर बारिश का खतरा

किसानों के लिए यह समय धान की कटाई कर फसल को सुरक्षित घर लाने का है, लेकिन मौसम की बेरुखी उनकी उम्मीदों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी और पक चुकी धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ऐसे में किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि बची हुई फसल को सुरक्षित समेट सकें।

 

पहले बाढ़, अब बारिश ने बढ़ाई परेशानी

 

इस वर्ष क्षेत्र के किसानों को पहले ही बाढ़ की मार झेलनी पड़ी। नदी-नालों में तेज बहाव और जलभराव के कारण कई किसानों की फसल प्रभावित हुई थी। किसान अभी उस नुकसान से उबर भी नहीं पाए थे कि बेमौसम बारिश ने उनकी परेशानियां फिर बढ़ा दी हैं।

 

खेती-किसानी पूरी तरह मौसम पर निर्भर होने के कारण लगातार प्राकृतिक विपरीत परिस्थितियां किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर डाल सकती हैं। जिन किसानों की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है, उनके सामने अब बची हुई फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती है।

 

फसल खराब होने के साथ कर्ज चुकाने की चिंता

 

किसानों की चिंता केवल फसल खराब होने तक सीमित नहीं है। खेती के लिए लिया गया कर्ज, खाद-बीज, कीटनाशक, मजदूरी और अन्य कृषि खर्च भी उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं। सालभर मेहनत और पूंजी लगाने के बाद यदि धान की फसल को नुकसान पहुंचता है, तो खर्च की भरपाई और कर्ज चुकाना मुश्किल हो सकता है।

 

किसानों के लिए धान की उपज ही परिवार की आर्थिक जरूरतों और आगामी कृषि सीजन की तैयारियों का प्रमुख आधार होती है। ऐसे में फसल का नुकसान उनकी आजीविका और भविष्य की खेती दोनों को प्रभावित कर सकता है।

 

प्रशासन से फसल सर्वे और राहत की उम्मीद

 

लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे किसानों को अब प्रशासन से राहत की उम्मीद है। प्रभावित गांवों और खेतों में फसल नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कर वास्तविक स्थिति का आकलन करने की आवश्यकता है। साथ ही पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा, फसल बीमा तथा शासन की प्रासंगिक योजनाओं के तहत राहत उपलब्ध कराने की मांग भी महत्वपूर्ण है।

 

समय पर सर्वे और आवश्यक सहायता मिलने से प्रभावित किसानों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सकती है। इसके लिए नुकसान की स्थिति, प्रभावित रकबे और किसानों की पात्रता का आकलन जरूरी होगा।

 

किसानों के सामने बड़ा सवाल, कब मिलेगी राहत?

 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले बाढ़ और अब बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों की सुध प्रशासन कब लेगा? क्या उनकी फसलों का समय पर आकलन कर राहत पहुंचाई जाएगी, या फिर किसानों को एक बार फिर अपनी मेहनत और किस्मत के भरोसे रहना पड़ेगा?

 

फिलहाल छोटेडोंगर क्षेत्र के किसान मौसम साफ होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि उनकी बची हुई फसल सुरक्षित घर पहुंच सके और सालभर की मेहनत पूरी तरह बर्बाद होने से बच जाए।

 

 

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!