header ads
अधिकारअबूझमाड़छत्तीसगढ़नई दिल्लीबस्तररायपुरराष्ट्रीय

बस्तर में स्थायी शांति के लिए निर्दोष मूलवासियों की रिहाई जरूरी: भारतीय किसान यूनियन

उपमुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, झीरम घाटी मामले में बंद 10 व्यक्तियों के संबंध में कानूनी प्रक्रिया अपनाने और शांति वार्ता में जेलों में बंद आदिवासियों को शामिल करने की मांग

बस्तर में स्थायी शांति के लिए निर्दोष मूलवासियों की रिहाई जरूरी: भारतीय किसान यूनियन

 

उपमुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, झीरम घाटी मामले में बंद 10 व्यक्तियों के संबंध में कानूनी प्रक्रिया अपनाने और शांति वार्ता में जेलों में बंद आदिवासियों को शामिल करने की मांग

 

नारायणपुर। बस्तर संभाग में स्थायी शांति स्थापित करने और संघर्ष से प्रभावित स्थानीय ग्रामीणों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने 13 अक्टूबर को नारायणपुर कलेक्टर के माध्यम से प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने नक्सल संघर्ष के दौरान जेलों में बंद निर्दोष मूलवासियों की रिहाई, विचाराधीन मामलों की समीक्षा और शांति प्रक्रिया में आम ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

नारायणपुर में बस्तर शांति और मूलवासियों की रिहाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपते भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी
बस्तर शांति और मूलवासियों की रिहाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपते भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी

भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि बस्तर में शांति स्थापित करने के प्रयास तभी सार्थक होंगे, जब संघर्ष से प्रभावित आदिवासी परिवारों और आम ग्रामीणों की समस्याओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। संगठन ने आरोप लगाया कि निराधार मामलों में लंबे समय से जेलों में बंद लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यूनियन के अनुसार, न्याय और मानवीय संवेदनाओं को शांति प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है।

 

पांच सूत्रीय मांगों के माध्यम से उठाया न्याय का मुद्दा

 

ज्ञापन में भारतीय किसान यूनियन ने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें निर्दोष मूलवासियों की रिहाई, बंदियों के मामलों की निष्पक्ष समीक्षा, अभियोजन वापसी की प्रक्रिया में तेजी और शांति वार्ता का दायरा बढ़ाना शामिल है।

 

निर्दोष मूलवासियों की रिहाई की मांग

 

संगठन ने नक्सल उग्रवाद से जुड़े मामलों में जेलों में बंद उन मूलवासियों की रिहाई की मांग की, जिनके विरुद्ध उसके अनुसार निराधार आरोप लगाए गए हैं। यूनियन का कहना है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और जिन बंदियों के खिलाफ आरोप प्रमाणित नहीं होते, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत मिलनी चाहिए। इससे प्रभावित परिवारों को राहत मिलने के साथ ग्रामीणों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हो सकेगा।

 

झीरम घाटी मामले में कानूनी उपाय अपनाने की अपील

 

ज्ञापन में वर्ष 2013 के झीरम घाटी हमले से संबंधित मामले में 10 व्यक्तियों को कथित रूप से दी गई मृत्युदंड की सजा का उल्लेख करते हुए संगठन ने इस संबंध में तत्काल कानूनी हस्तक्षेप की मांग की। यूनियन का तर्क है कि यदि सरकार माओवादी नेतृत्व के साथ शांति और समाधान के रास्ते तलाश सकती है, तो न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में बंद व्यक्तियों के मामलों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

 

संगठन ने संबंधित बंदियों के लिए उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने और उनकी रिहाई की मांग की है। हालांकि, मृत्युदंड, अपील और रिहाई से जुड़े किसी भी निर्णय का निर्धारण सक्षम न्यायालय और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

 

शांति वार्ता में जेलों में बंद आदिवासियों को भी मिले जगह

 

भारतीय किसान यूनियन ने मांग की कि सरकार और माओवादी संगठनों के बीच शांति स्थापित करने के प्रयास केवल हथियार छोड़ने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। जेलों में बंद ऐसे आदिवासियों और ग्रामीणों के मामलों को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए, जो मुख्यधारा में लौटकर अपने परिवारों के साथ सामान्य जीवन बिताना चाहते हैं।

 

यूनियन का मानना है कि बस्तर में स्थायी शांति के लिए उन परिवारों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है, जो लंबे समय से कानूनी और सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

 

अभियोजन वापसी की प्रक्रिया तेज करने की मांग

 

ज्ञापन में सरकार द्वारा गठित समीक्षा समिति की कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए संगठन ने मामलों की समीक्षा और अभियोजन वापसी की कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की। यूनियन के अनुसार, जिन मामलों में कानूनी आधार पर अभियोजन वापस लेने की संभावना है, उनमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक मामले का परीक्षण तथ्यों, साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप किया जाना चाहिए।

 

शांति और विकास के साथ न्याय को भी मिले प्राथमिकता

 

संगठन ने कहा कि बस्तर में शांति का अर्थ केवल हिंसा में कमी या सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का समाधान नहीं है। इसके साथ आम ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा, प्रभावित परिवारों को न्याय और समाज में विश्वास बहाली भी जरूरी है। यूनियन ने सरकार से आग्रह किया कि शांति प्रक्रिया को गांवों तक पहुंचाया जाए और स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए प्रभावी पहल की जाए।

 

किसान यूनियन के पदाधिकारी और प्रभावित परिवार रहे मौजूद

 

ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही, संभाग अध्यक्ष शिवा स्वर्णकार, गरियाबंद जिला अध्यक्ष मदनलाल साहू, नारायणपुर जिला अध्यक्ष रुबजी सलाम और बस्तर जिला अध्यक्ष रमेश गोयल उपस्थित रहे। इनके अलावा नरसिंह मंडावी, सूरज कुमार नेताम, सोमजी सलाम, श्यामलाल दुग्गा तथा जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों के परिवारों के सदस्य भी मौजूद थे।

 

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील

 

भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से बस्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए न्याय, संवाद और मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। संगठन ने कहा कि जब तक संघर्ष से प्रभावित ग्रामीणों और उनके परिवारों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक शांति और विकास की कोशिशों को पूरी सफलता नहीं मिल सकेगी।

 

ज्ञापन के माध्यम से यूनियन ने स्पष्ट किया कि बस्तर में शांति की पहल को व्यापक बनाने के लिए आम नागरिकों, आदिवासी परिवारों और जेलों में बंद लोगों से जुड़े मामलों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। अब इस मांग पर शासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!