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बस्तर के जैविक वनोपज को मिलेगी वैश्विक पहचान, माँ दंतेश्वरी महिला किसान कंपनी को मिला एनपीओपी प्रमाणपत्र

दण्डक ब्रांड से बाजार में उतरेंगे स्थानीय उत्पाद, 1080 महिला शेयरधारकों और 2100 वनोपज संग्राहक दीदियों की आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

बस्तर के जैविक वनोपज को मिलेगी वैश्विक पहचान, माँ दंतेश्वरी महिला किसान कंपनी को मिला एनपीओपी प्रमाणपत्र

 

दण्डक ब्रांड से बाजार में उतरेंगे स्थानीय उत्पाद, 1080 महिला शेयरधारकों और 2100 वनोपज संग्राहक दीदियों की आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

 

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन हासिल करने वाली प्रदेश की पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बनी

दंतेवाड़ा की माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी और बस्तर के वनोपज आधारित उत्पाद
माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी को वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन मिलने से बस्तर के स्थानीय उत्पादों को नए बाजार मिलने की उम्मीद है।

दंतेवाड़ा/रायपुर, 11 अक्टूबर 2026। बस्तर की प्राकृतिक संपदा और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत को अब व्यापक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड को राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के तहत वनोपज के लिए जैविक प्रमाणपत्र मिला है। यह उपलब्धि प्रदेश में मिशन के अंतर्गत गठित महिला किसान उत्पादक कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे दंतेवाड़ा के प्रमाणित जैविक वनोपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और स्थानीय महिलाओं की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

 

उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर कंपनी से जुड़ी महिलाओं और बिहान मिशन की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के माध्यम से बस्तर के समग्र विकास को आगे बढ़ा रही है। महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार हैं।

 

जैविक प्रमाणन से वनोपज को मिलेगा बेहतर बाजार

 

बस्तर के जंगल महुआ, इमली, कोदो, कुटकी और अन्य पारंपरिक उत्पादों की प्राकृतिक संपदा से समृद्ध हैं। यहां की महिलाएं पीढ़ियों से वनोपज के संग्रहण और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। हालांकि, स्थानीय बाजारों तक सीमित पहुंच और मूल्य संवर्धन की कमी के कारण कई बार उन्हें अपने उत्पादों का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता।

 

एनपीओपी प्रमाणन से निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले प्रमाणित उत्पादों की पहचान और विपणन के नए अवसर खुल सकते हैं। इससे कंपनी को व्यवस्थित बाजारों से जुड़ने, उत्पादों की गुणवत्ता संबंधी विश्वसनीयता बढ़ाने और भविष्य में निर्यात की संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है।

 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जैविक प्रमाणन केवल उत्पाद की पहचान नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के परिश्रम और पारंपरिक ज्ञान को सम्मान देने का माध्यम भी है। प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन जैसी गतिविधियों का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

 

1080 महिला शेयरधारक, 60 उत्पादक समूह और एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार

 

वर्ष 2023 में गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर वनोपज आधारित आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से काम कर रही है।

 

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी से 1080 महिला शेयरधारक जुड़ी हुई हैं। इसके अतिरिक्त जिले के 60 उत्पादक समूहों से संबंधित लगभग 2100 वनोपज संग्राहक महिलाएं भी इसकी गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं।

 

कंपनी ने पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है। पिछले वर्ष लगभग 54 लाख रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई, जबकि चालू वर्ष में अब तक 50 लाख रुपये से अधिक के वनोपज की खरीदी की जा चुकी है।

 

कंपनी अब केवल वनोपज की खरीदी-बिक्री तक सीमित नहीं रहना चाहती। मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इससे संग्राहक महिलाओं को बाजार की बेहतर व्यवस्था से जोड़ने और उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

‘दण्डक ब्रांड’ से स्थानीय उत्पादों को मिलेगी नई पहचान

 

स्थानीय उत्पादों को एक विशिष्ट पहचान देने के लिए माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी ने ‘दण्डक ब्रांड’ की शुरुआत की है। इसी क्रम में दंतेवाड़ा में कंपनी के विशेष बिक्री केंद्र का शुभारंभ किया गया है।

 

इस केंद्र के माध्यम से स्थानीय खाद्य उत्पादों और वनोपज को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। दण्डक ब्रांड के अंतर्गत नीम फूल, एचएमटी चावल, लाल चूड़ी चावल, बासमती चावल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी सहित विभिन्न उत्पाद बाजार में उतारे गए हैं।

 

उत्पादों की पैकेजिंग, प्रस्तुति और विपणन को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय उपज को व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाया जा सके। योजना के अनुसार, दण्डक ब्रांड के उत्पादों की बिक्री छत्तीसगढ़ के स्थानीय छत्तीसकला ब्रांड के अंतर्गत राज्य, देश और संभावित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।

 

स्थानीय बाजार से बड़े बाजारों तक पहुंचने की उम्मीद

 

कंपनी के उत्पादों को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसर तलाशे जा रहे हैं। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और संबंधित संस्थाओं के सहयोग से निर्यात की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।

 

हालांकि, जैविक प्रमाणन मिलने मात्र से प्रत्येक उत्पाद स्वतः निर्यात योग्य नहीं हो जाता। संबंधित उत्पाद, प्रमाणन का दायरा, लागू मानक और बाजार की आवश्यकताएं पूरी करना भी जरूरी होगा। इन प्रक्रियाओं के आगे बढ़ने पर बस्तर के वनोपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

 

विमला ठाकुर बोलीं, अब मेहनत का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद

 

दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के नेलेवाड़ा गांव की निवासी और माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी की अध्यक्ष विमला ठाकुर ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई।

 

उन्होंने बताया कि पहले संग्रहित वनोपज की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों में होती थी, जहां कई बार उत्पादों का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता था। बिहान मिशन के सहयोग से दण्डक ब्रांड की शुरुआत और अब एनपीओपी प्रमाणन मिलने से कंपनी से जुड़ी महिलाओं में नई उम्मीद जगी है।

 

विमला ठाकुर के अनुसार, इस पहल से महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने और उनकी आमदनी बढ़ने की संभावना है। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने तथा महिलाओं को संगठित उद्यम से जोड़ने में भी मदद मिल सकती है।

 

महिला सशक्तिकरण से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

 

कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के नेतृत्व में जिला प्रशासन की पहल और ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रयासों से कंपनी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। वनोपज का प्रमाणन, स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।

 

बस्तर की महिलाओं के पास जंगलों और पारंपरिक उत्पादों से जुड़ा अनुभव तथा स्थानीय संसाधनों का ज्ञान है। यदि उन्हें उचित मूल्य, बेहतर बाजार, प्रशिक्षण और प्रसंस्करण की सुविधाएं लगातार मिलती हैं, तो वनोपज आधारित उद्यम उनके लिए स्थायी आजीविका का मजबूत विकल्प बन सकते हैं।

 

माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी को मिला एनपीओपी प्रमाणपत्र इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब चुनौती इस उपलब्धि को नियमित बिक्री, उचित मूल्य और वास्तविक आय वृद्धि में बदलने की होगी। दण्डक ब्रांड को व्यापक बाजार में पहचान मिलने के साथ बस्तर की मेहनतकश महिलाओं के उत्पादों को भी नई संभावनाएं मिल सकती हैं।

 

दंडकारण्य दर्पण | सच के साथ, समाज के साथ।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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