बस्तर में बाढ़ को लेकर सांसद महेश कश्यप की बड़ी मांग, 500 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की मांग
पीएम मोदी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को पत्र लिखकर प्रभावित परिवारों, फसल, मकान और मवेशियों के नुकसान की भरपाई की मांग
बस्तर की बाढ़ पर सांसद महेश कश्यप ने केंद्र के सामने रखा 500 करोड़ का राहत प्रस्ताव
प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को लिखा पत्र, बस्तर के लिए 300 करोड़, सुकमा और बीजापुर के लिए 100-100 करोड़ की मांग
रायपुर/जगदलपुर। बस्तर संभाग में सितंबर के अंतिम सप्ताह में आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप ने केंद्र सरकार के सामने व्यापक राहत और दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन का प्रस्ताव रखा है। सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए कुल 500 करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक सहायता पैकेज की मांग की है।

सांसद की मांग के अनुसार इस प्रस्तावित पैकेज में बस्तर जिले के लिए 300 करोड़ रुपये, सुकमा के लिए 100 करोड़ रुपये और बीजापुर के लिए 100 करोड़ रुपये शामिल हैं। उनका कहना है कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मकानों के पुनर्निर्माण और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए विशेष आर्थिक सहायता जरूरी है।
24 से 27 सितंबर के बीच भारी बारिश और बाढ़ का उल्लेख
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में सांसद महेश कश्यप ने उल्लेख किया है कि चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से 24 सितंबर से 27 सितंबर 2026 तक बस्तर संभाग, विशेषकर बस्तर, सुकमा और बीजापुर जिलों में मूसलाधार बारिश हुई। इसी दौरान ओडिशा स्थित खातीगुड़ा बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने और इंद्रावती नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई।
हालिया रिपोर्टों में भी बस्तर में भारी बारिश, इंद्रावती नदी के उफान और ओडिशा के बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद व्यापक बाढ़ की स्थिति का उल्लेख किया गया है।
सांसद के पत्र में बाढ़ से हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि अनुमानित तौर पर बस्तर जिले में करीब 700, सुकमा में 100 और बीजापुर में करीब 90 मकान ढह गए। इसके अलावा सड़क और पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हुए तथा फसलों और अन्य संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
केवल राहत नहीं, पुनर्वास के लिए भी पैकेज
सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि राहत राशि को केवल तत्काल सहायता तक सीमित न रखा जाए। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मकान निर्माण और बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
पत्र में बाढ़ प्रभावित खरीफ फसलों के लिए विशेष राहत राशि, क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण, बाढ़ में बह गए पशुधन तथा प्रभावित छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के नुकसान का सर्वे कराकर सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है।
जोरा नाला की नई DPR और हाइड्रोलॉजिकल स्टडी की मांग
सांसद महेश कश्यप ने बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जोरा नाला की नए सिरे से DPR तैयार करने की मांग की है। इसके लिए आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराने और इंद्रावती नदी के जल विचलन तथा जोरा नाला में अनियंत्रित कटाव की स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन करने का सुझाव दिया गया है।
इसके साथ ही जोरा नाला पर आधुनिक गेटेड रेगुलेटर स्ट्रक्चर विकसित करने की मांग की गई है, ताकि मानसून के दौरान अतिरिक्त जलप्रवाह को नियंत्रित किया जा सके और बाढ़ के दबाव को कम किया जा सके।
इंद्रावती में ड्रेजिंग और जगदलपुर में आधुनिक ड्रेनेज
पत्र में इंद्रावती नदी के तल में गाद और अवरोधों को दूर करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग कराने का सुझाव दिया गया है। सांसद ने जगदलपुर शहर के लिए इंटीग्रेटेड स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने तथा नदी के संवेदनशील हिस्सों में गाइड बंड और तटबंध जैसी संरचनाएं विकसित करने की आवश्यकता भी बताई है।
इसके अलावा इंद्रावती नदी और उससे जुड़े जलग्रहण क्षेत्रों में वनीकरण, मृदा संरक्षण और कैचमेंट एरिया मैनेजमेंट पर भी जोर दिया गया है।
24 से 48 घंटे पहले मिले बाढ़ की चेतावनी
सांसद ने भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए रियल टाइम चेतावनी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। पत्र में ओडिशा के बांधों से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा और समय से संबंधित रियल टाइम टेलीमेट्री डेटा छत्तीसगढ़ प्रशासन के साथ साझा करने की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है।
साथ ही इंद्रावती बेसिन में सेंसर आधारित चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की मांग की गई है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को पानी छोड़े जाने से कम से कम 24 से 48 घंटे पहले अलर्ट किया जा सके।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए केंद्रीय टीम भेजने का आग्रह
सांसद महेश कश्यप ने केंद्र सरकार से बस्तर में अंतर-मंत्रालयीन केंद्रीय टीम भेजकर बाढ़ से हुए नुकसान का भौतिक सत्यापन कराने और उसके आधार पर विशेष राहत, पुनर्वास तथा बाढ़ प्रबंधन पैकेज को मंजूरी देने का आग्रह किया है।
बस्तर में बाढ़ के दौरान राहत और बचाव अभियान भी चलाए गए। एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ को बाढ़ राहत और बचाव के लिए चार स्पीड बोट उपलब्ध कराई थीं। इस दौरान सांसद महेश कश्यप ने भी प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था और मुआवजे को लेकर प्रशासन से चर्चा की थी।
सांसद की मांग का फोकस तत्काल राहत के साथ भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए स्थायी जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर है। अब केंद्र और राज्य सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर बस्तर संभाग के प्रभावित लोगों की नजर बनी हुई है।
दंडकारण्य दर्पण | सच के साथ, समाज के साथ



