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CG News: सीमावर्ती जंगलों में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई नक्सलियों के हथियार, विस्फोटक और गुप्त डम्प बरामद

कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर पर संयुक्त अभियान में भारी मात्रा में नक्सली सामग्री जब्त, जंगलों में करोड़ों रुपये और छिपे ठिकानों की तलाश में लगातार जारी है सर्चिंग ऑपरेशन

सीमावर्ती जंगलों में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई

कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर पर नक्सलियों के हथियार और विस्फोटक डम्प बरामद, लगातार सर्चिंग अभियान से बढ़ी नक्सल नेटवर्क में बेचैनी

नारायणपुर। कांकेर और नारायणपुर जिले के सीमावर्ती नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। जिला पुलिस, डीआरजी, बीएसएफ और बीडीएस टीम द्वारा चलाए गए दो अलग-अलग अभियानों में भारी मात्रा में नक्सली डम्प सामग्री, हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई को नक्सल नेटवर्क के खिलाफ चल रहे लगातार अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार कोयलीबेड़ा और छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया। अभियान के दौरान जवानों ने जंगल में छिपाकर रखी गई नक्सल सामग्री बरामद की। बरामद सामानों में कंट्रीमेड बीजीएल लांचर, 12 बोर रायफल, बीजीएल सेल, इलेक्ट्रिक और नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, गन पाउडर, सुतली बम, नक्सली वर्दी और अन्य विस्फोटक सामग्री शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने सभी सामग्री को सुरक्षित कब्जे में लेकर नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चलाए गए इस संयुक्त अभियान में सुरक्षा बलों ने कठिन परिस्थितियों और घने जंगलों के बीच कई किलोमीटर पैदल सर्चिंग की। अधिकारियों का कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार दबाव बनाए रखने के लिए सर्चिंग अभियान आगे भी जारी रहेगा। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जंगलों के भीतर अब भी कई ऐसे गुप्त ठिकाने मौजूद हैं जहां नक्सलियों ने हथियार, विस्फोटक और बड़ी मात्रा में नकदी छिपाकर रखी हुई है।

पिछले दिनों नारायणपुर और महाराष्ट्र बॉर्डर क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने करोड़ों रुपये नकद बरामद किए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि नक्सली संगठन लंबे समय से जंगलों के भीतर गुप्त स्थानों पर पैसे, सोना और हथियार दबाकर रखते रहे हैं ताकि सुरक्षा बलों की नजर से बचा जा सके। लगातार चल रही सर्चिंग और खुफिया इनपुट के आधार पर अब ऐसे कई ठिकानों का खुलासा हो रहा है।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार नक्सलियों के कमजोर पड़ते नेटवर्क के कारण अब उनके पुराने डम्प और छिपे हुए संसाधन भी सामने आने लगे हैं। जवान लगातार उन इलाकों में अभियान चला रहे हैं जहां पहले सुरक्षा कारणों से पहुंचना बेहद कठिन माना जाता था। अब सड़क, कैंप और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के चलते जवान अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंचकर नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने में जुटे हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलियों के हथियार और आर्थिक संसाधनों पर लगातार हो रही कार्रवाई उनके संगठनात्मक ढांचे को कमजोर कर सकती है। विस्फोटक सामग्री और हथियारों की बरामदगी से संभावित बड़ी घटनाओं को भी रोका जा सकता है। वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती सुरक्षा गतिविधियों से स्थानीय ग्रामीणों में भी सुरक्षा का भरोसा मजबूत हो रहा है।

कांकेर और नारायणपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नक्सल प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त सर्चिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। सुरक्षा बलों का उद्देश्य जंगलों में छिपे नक्सली ठिकानों को पूरी तरह खत्म करना और क्षेत्र में शांति एवं विकास का वातावरण स्थापित करना है। लगातार हो रही कार्रवाई से यह संकेत मिल रहे हैं कि अब सुरक्षा एजेंसियां नक्सलियों के नेटवर्क, संसाधनों और गुप्त ठिकानों तक तेजी से पहुंच बना रही हैं।

Bindesh Patra

युवा वहीं होता हैं, जिसके हाथों में शक्ति पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

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