25 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता, ग्रामीणों ने कुदाल-फावड़ा उठाकर खुद बनाई पगडंडी
दुर्गीपारा में स्कूल भवन और आंगनबाड़ी की कमी से लेकर जर्जर सड़कों तक पहुंची बदहाली, जिला पंचायत सदस्यों ने लिया जायजा; 10 दिन में काम शुरू कराने की मांग
नारायणपुर। अबूझमाड़ के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में विकास की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। ग्राम पंचायत गुदाड़ी के आश्रित ग्राम दुर्गीपारा और आसपास के क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जिला पंचायत सदस्य एवं शिक्षा समिति सदस्य राकेश उसेंडी तथा जिला पंचायत सदस्य गुड्डू उसेंडी ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित स्थानों का निरीक्षण किया।

ओरछा से दुर्गीपारा तक पहुंचने वाला करीब 25 किलोमीटर लंबा रास्ता आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी मार्ग से हांडावाड़ा जलप्रपात की ओर भी पहुंचा जाता है। ग्रामीणों के अनुसार रास्ते में जगह-जगह बड़े पत्थर, ऊबड़-खाबड़ जमीन और संकरी पगडंडी होने के कारण दोपहिया वाहन चलाना भी मुश्किल है। सामान्य वाहन तो कई हिस्सों में पहुंच ही नहीं पाते।
राशन और रोजमर्रा की जरूरत का सामान लाने के लिए ग्रामीणों को लंबे रास्ते तक पैदल चलना पड़ता है। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों ने खुद संभाला रास्ता सुधारने का काम
सड़क की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन का इंतजार करने के बजाय खुद ही रास्ता सुधारने की कोशिश शुरू कर दी। ग्रामीण कुदाल, फावड़ा, गैंती और सब्बल लेकर रास्ते में उतरे और बड़े पत्थरों को हटाकर पगडंडी को चलने योग्य बनाने में जुट गए।
जनप्रतिनिधियों ने मौके पर ग्रामीणों के इस श्रमदान को देखा और उनकी समस्या को गंभीरता से लिया। राकेश उसेंडी और गुड्डू उसेंडी ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर पर रास्ता सुधारने की कोशिश इस बात का प्रमाण है कि गांव में बुनियादी सड़क सुविधा की कितनी जरूरत है।
दोनों सदस्यों ने कहा कि मौके की वास्तविक स्थिति और ग्रामीणों की समस्याओं से कलेक्टर को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि अधिकतम 10 दिनों के भीतर रास्ते के सुधार अथवा निर्माण की दिशा में काम शुरू किया जाए।
घोटुल में चल रहा स्कूल, आंगनबाड़ी के लिए भवन तक नहीं
दुर्गीपारा में निरीक्षण के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर स्थिति भी सामने आई। गांव में बच्चों के लिए अलग स्कूल भवन उपलब्ध नहीं है और घोटुल में स्कूल का संचालन किया जा रहा है। वहीं गांव में आंगनबाड़ी के लिए भी अलग भवन नहीं है।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्र के बच्चों को भी बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए। स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भवन उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस संबंध में प्रशासन और संबंधित विभाग के समक्ष जल्द प्रस्ताव रखने की बात कही गई।
दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं भी चुनौतीपूर्ण
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी नर्स से भी जनप्रतिनिधियों की मुलाकात हुई। ग्रामीणों ने बताया कि दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्यकर्मी क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। सड़क सुविधा के अभाव में मरीजों को मुख्य मार्ग अथवा अस्पताल तक पहुंचाना कई बार बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जाना जरूरी है।
मंडाली स्कूल में बारिश का पानी कक्षा के अंदर
निरीक्षण के दौरान मंडाली स्थित स्कूल की स्थिति भी देखी गई। स्कूल भवन में मरम्मत की आवश्यकता सामने आई। बारिश के दौरान भवन से पानी टपककर कक्षाओं के भीतर आने की शिकायत शिक्षकों और ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के सामने रखी।
गुदाड़ी क्षेत्र के स्कूल भवन में भी मरम्मत की जरूरत बताई गई। जनप्रतिनिधियों ने संबंधित विभागों से स्कूल भवनों की स्थिति का परीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य कराने की मांग की।
सड़क नहीं तो योजनाओं का लाभ गांव तक कैसे पहुंचेगा
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण बोर खनन, पेयजल, स्वास्थ्य, भवन निर्माण और अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी परेशानी आती है। कई स्थानों पर ग्रामीण आज भी नदी-नालों के पानी पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी ने कहा कि सड़क किसी भी गांव के विकास की बुनियादी जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब गांव तक पहुंचने का रास्ता ही सुगम नहीं होगा, तो स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य, पेयजल, राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना मुश्किल रहेगा।
उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ और अन्य दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को कागजों से निकालकर जमीन पर उतारने की जरूरत है। इसके लिए नियमित जमीनी निरीक्षण और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।
समस्याओं को प्रशासन के समक्ष प्राथमिकता से रखने का भरोसा
जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी और गुड्डू उसेंडी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि दुर्गीपारा सहित आसपास के गांवों की सड़क, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य और पेयजल से जुड़ी समस्याओं को कलेक्टर तथा संबंधित विभागों के समक्ष प्राथमिकता से रखा जाएगा।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की वास्तविक तस्वीर तभी बदलेगी, जब अंतिम छोर तक पहुंचकर समस्याओं को समझा जाए और उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई हो।
दुर्गीपारा का निरीक्षण इस बात को सामने लाता है कि अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों में आज भी सड़क और बुनियादी सुविधाएं बड़ी चुनौती हैं। ग्रामीणों द्वारा खुद कुदाल और फावड़ा उठाकर रास्ता सुधारने की कोशिश प्रशासन के लिए भी एक गंभीर संदेश है कि इन इलाकों में विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ जमीन पर उतारने की जरूरत है।



