
मशरूम की खेती में ऐसी तकनीक अपनाएं तो किसान कमा सकते हैं लाखों
कृषि संदेश
नारायणपुर: पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजार में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी है, जिस हिसाब से बाजार में इसकी मांग है, उस हिसाब से अभी इसका उत्पादन नहीं हो रहा है, ऐसे में किसान मशरूम की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
खेती की विधि
मशरूम की खेती हेतु गेहूं के भूसे (पैरा कटिंग) को बोरे में रात भर के लिए साफ पानी में भिगो दिया जाता है यदि आवश्यक हो तो 7 ग्राम कार्बेन्डाइजिन (50 प्रतिशत) तथा 115 मिली0 फार्सलीन प्रति 100 लीटर पानी की दर से मिला दिया जाता है, इसके पश्चात भूसे को बाहर निकालकर अतिरिक्त पानी निथारकर अलग कर दिया जाता है और जब भूसे से लगभग 70 प्रतिशत नमी रह जाये तब यह बिजाई के लिए तैयार हो जाता है।
बिजाई
इसमें ढिंगरी मशरूम की तरह की बिजाई की जाती है परन्तु स्थान की मात्रा ढिंगरी मशरूम से दो गुनी (5-6 प्रतिशत) प्रयोग की जाती है तथा बिजाई करने के बाद थैलों में छिद्र नहीं बनाये जाते है। बिजाई के बाद तापक्रम 28-32 डिग्री होना चाहिये बिजाई के बाद इन थैलों को फसल कक्ष में रख देते है।
आवरण मृदा तैयार करना
विजाई के वी 20-25 दिन बाद फफूँद पूरे भूसे में सामान रूप से फैल जाती है, इसके बाद आवरण मृदा तैयार कर 2 से 3 इंच मोटी पर्त थैली के मुँह को खोलकर ऊपर समान रूप से फैला दिया जाता है इसके पश्चात पानी के फव्वारे से इस तरह आवरण मृदा के ऊपर सिचाई की जाती है कि पानी से आवरण मृदा की लगभग आधी मोटाई ही भीगने पाये आवरण मृदा लगाने के लगभग 20 से 25 दिन बाद आवरण मृदा के ऊपर मशरूम की बिन्दुनुमा अवस्था दिखाई देने लगती है। इस समय फसल का तापमान 32 से 35 तथा आर्द्रता 90 प्रतिशत से अधिक बनाये रखा जाता है अगले 3 से 4 दिन में मशरूम तोड़ाई योग्य हो जाती है।
उपज
सूखे भूसें के भार का 70 से 80 प्रतिशत उत्पादन प्राप्त होता है।
धान के पैरा (पुआल) का मशरूम भी इसी प्रकार की विधि से खेती कर सकते हैं बस कुछ जानकारियां और रखनी होती है।
मशरूम की खेती को करने के लिए गुणवत्तायुक्त स्थान अति आवश्यक है , मशरूम की खेती में आप रुचि लेते हो और कृषि क्षेत्र में आमदनी बढ़ाना चाहते हो तो कृषि केंद्र या मशरूम की खेती में जानकार व्यक्ति से संपर्क कर और अच्छे कृषि कर सकते हैं।
दंडकारण्य दर्पण