नियद नेल्लानार के गांवों में डिजिटल बैंकिंग की पहल, महिलाओं को मिला मोबाइल बैंकिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण

कच्चापाल में जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न, यूपीआई, क्यूआर कोड से लेन-देन और साइबर धोखाधड़ी से बचाव के बताए गए तरीके

नियद नेल्लानार के गांवों में डिजिटल बैंकिंग की पहल, महिलाओं को मिला मोबाइल बैंकिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण

 

कच्चापाल में जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न, यूपीआई, क्यूआर कोड से लेन-देन और साइबर धोखाधड़ी से बचाव के बताए गए तरीके

 

नारायणपुर। नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत आने वाले गांवों की महिलाओं एवं स्व-सहायता समूहों को डिजिटल बैंकिंग से जोड़ने और वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ग्राम कच्चापाल में डिजिटल एवं मोबाइल बैंकिंग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं को मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, क्यूआर कोड के माध्यम से लेन-देन और साइबर धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी गई।

कच्चापाल में महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CCOST), रायपुर द्वारा प्रायोजित तथा शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणपुर द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर 2026 को सम्पन्न हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य दूरस्थ वनांचल के गांवों की महिलाओं को सुरक्षित डिजिटल लेन-देन के लिए जागरूक एवं सक्षम बनाना था।

 

अतिथियों की उपस्थिति में हुआ शुभारंभ

 

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस. आर. कुंजाम, महाविद्यालय के गणमान्य अतिथियों तथा ग्राम कच्चापाल स्थित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद विद्या मंदिर आश्रम के प्राचार्य श्री कमलेश शर्मा की उपस्थिति में हुआ।

 

इस अवसर पर परियोजना समन्वयक एवं भौतिकशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. बी. डी. चांडक, सह-समन्वयक डॉ. हरि शंकर कुमार तथा महाविद्यालय के अतिथि व्याख्याता उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम के दौरान श्री कमलेश शर्मा का सम्मान डॉ. एस. आर. कुंजाम ने किया। वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, नारायणपुर के ऑनलाइन बैंकिंग विशेषज्ञ श्री राशिद अंसारी का सम्मान प्रो. बी. डी. चांडक ने किया। ग्राम कच्चापाल की प्रतिभागी बहनों श्रीमती सरंगी उसेंडी एवं श्रीमती राजे वड्डे को प्राचार्य डॉ. कुंजाम ने शॉल एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

 

मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

 

प्रशिक्षण सत्र में ऑनलाइन बैंकिंग विशेषज्ञ श्री राशिद अंसारी ने प्रतिभागियों को मोबाइल बैंकिंग एप के उपयोग, यूपीआई के माध्यम से भुगतान, क्यूआर कोड स्कैन कर लेन-देन करने तथा क्यूआर कोड जनरेट करने की प्रक्रिया समझाई।

 

उन्होंने डिजिटल लेन-देन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विशेष जोर देते हुए साइबर धोखाधड़ी से बचाव के तरीके बताए। प्रतिभागियों को एटीएम पिन, यूपीआई पिन और ओटीपी गोपनीय रखने तथा अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल और धोखाधड़ी वाले संदेशों से सतर्क रहने की जानकारी दी गई।

 

प्रशिक्षण को स्थानीय महिलाओं के लिए अधिक सहज और उपयोगी बनाने के उद्देश्य से श्री प्रदीप सलाम एवं सुश्री देविका नेताम ने गोंडी और अबूझमाड़िया भाषाओं में द्विभाषिक व्याख्यान दिया। इससे प्रतिभागियों को अपनी भाषा में डिजिटल बैंकिंग की बारीकियां समझने का अवसर मिला। महिलाओं ने डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया का स्वयं अभ्यास भी किया।

 

आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

 

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस. आर. कुंजाम ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने और उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। उन्होंने आगामी चरणों में नियद नेल्लानार क्षेत्र के अन्य गांवों की महिलाओं के लिए भी व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।

 

परियोजना समन्वयक प्रो. बी. डी. चांडक ने बताया कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन मिलेगा और गांवों तथा शहरों के बीच डिजिटल विभाजन को कम करने में मदद मिलेगी।

 

प्राचार्य डॉ. कुंजाम ने परियोजना टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डिजिटल बैंकिंग के माध्यम से बस्तर क्षेत्र में डिजिटल जागरूकता, ग्रामीण विकास और तकनीकी सशक्तिकरण को नई दिशा मिल सकती है।

 

महिलाओं, ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

 

कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, स्थानीय ग्रामीणों, महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

 

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर द्वारा प्रायोजित इस परियोजना का उद्देश्य नियद नेल्लानार (आपका अच्छा गांव) क्षेत्र की महिलाओं एवं स्व-सहायता समूहों को डिजिटल और मोबाइल बैंकिंग का प्रशिक्षण देकर सुरक्षित डिजिटल लेन-देन, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए सक्षम बनाना है। सुदूर वनांचल में इस तरह के प्रयास ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़ने और बैंकिंग सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं।

 

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