कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने किया रेशम विभाग का शैक्षणिक भ्रमण, जानी उत्पादन की बारीकियां

रेशम कीटपालन से ककून विक्रय तक की प्रक्रिया समझी, कृषि आधारित आजीविका और रोजगार की संभावनाओं से हुए रूबरू

 

नारायणपुर, 24 अक्टूबर 2026। कृषि महाविद्यालय नारायणपुर के विद्यार्थियों ने प्रोफेसरों के साथ रेशम विभाग का शैक्षणिक भ्रमण कर रेशम उत्पादन और रेशम कीटपालन की विभिन्न प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ कृषि आधारित गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करना और रेशम उत्पादन की संभावनाओं से परिचित कराना था।

शहतूत गार्डन का शैक्षणिक भ्रमण

भ्रमण के दौरान रेशम विभाग के जिला अधिकारी नागेन्द्र पटेल ने विद्यार्थियों को मलबरी योजना के अंतर्गत संचालित रेशम कीटपालन कार्य की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने रेशम उत्पादन की प्रक्रिया, कीटपालन की विभिन्न अवस्थाओं तथा उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल तरीके से समझाया।

 

अंडों से ककून निर्माण तक की प्रक्रिया की जानकारी

 

विद्यार्थियों को मलबरी रेशम कीटों के अंडों की प्राप्ति के स्रोत, कीटपालन के विभिन्न चरणों और ककून निर्माण की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। इसके साथ ही ककून के विक्रय तथा उत्पादन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी दी गई, जिससे विद्यार्थी रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकें।

 

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों एवं प्रोफेसरों ने रेशम केंद्र नारायणपुर में संचालित मलबरी रेशम कीटपालन कार्य का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। यहां उन्होंने कीटपालन की गतिविधियों को नजदीक से देखा और रेशम उत्पादन से संबंधित जानकारियां हासिल कीं।

 

शहतूत गार्डन का भी किया अवलोकन

 

भ्रमण के तहत विद्यार्थियों ने शहतूत गार्डन का भी निरीक्षण किया। इस दौरान शहतूत के पौधों के महत्व और रेशम उत्पादन में उनकी उपयोगिता के बारे में बताया गया। शहतूत आधारित रेशम उत्पादन में पौधों की भूमिका को समझते हुए विद्यार्थियों ने कृषि और रेशम उद्योग के बीच के संबंधों की जानकारी प्राप्त की।

 

कृषि आधारित रोजगार की संभावनाओं को समझने का अवसर

 

यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए केवल जानकारी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें कृषि आधारित आजीविका और रोजगार की संभावनाओं को समझने का अवसर भी मिला। रेशम उत्पादन जैसी गतिविधियां कृषि के विविधीकरण और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के विकल्पों को जानने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

 

रेशम विभाग के भ्रमण से विद्यार्थियों को रेशम कीटपालन, शहतूत पौधों की उपयोगिता और ककून उत्पादन से जुड़ी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। इस प्रकार का शैक्षणिक अनुभव विद्यार्थियों की विषयगत समझ को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में नए अवसरों की पहचान करने में सहायक हो सकता है।

 

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