
किसानों की फसल बीमा राशि दिलाने के नाम पर रिश्वत का आरोप, कांकेर में दो कृषि अधिकारी पकड़े गए
₹90 हजार की बीमा राशि के बदले मांगे गए थे ₹10 हजार, ACB ने कार्रवाई कर दोनों अधिकारियों को पकड़ा
नारायणपुर/कांकेर। किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए नियुक्त अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाएं। लेकिन छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से सामने आए एक मामले ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फसल बीमा की राशि दिलाने के एवज में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने दो ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
₹90 हजार की बीमा राशि के लिए मांगी गई कथित रिश्वत
प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामला आमाबेड़ा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत आलानार का है। किसानों की लगभग ₹90 हजार की फसल बीमा राशि दिलाने के बदले ₹10 हजार की कथित मांग किए जाने की शिकायत ACB तक पहुंची थी।
रिपोर्टों में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी प्रवीण चंद्राकर और सुंदर बछड़ के नाम सामने आए हैं। शिकायत के आधार पर ACB की टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई और 14 अक्टूबर 2026 को दोनों अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने का आरोप
फसल बीमा प्राकृतिक आपदा या फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहारा देने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था है। ऐसे में बीमा राशि प्राप्त करने के लिए यदि किसी किसान को कथित रूप से रिश्वत देने के लिए मजबूर होना पड़े, तो यह सरकारी सेवा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी
इस मामले ने किसानों के लिए संचालित योजनाओं में निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले किसी भी तरह की अवैध वसूली की शिकायत पर निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।
मामले में आरोपों और आगे की कानूनी प्रक्रिया की स्थिति संबंधित जांच एजेंसी के आधिकारिक अभिलेखों से सत्यापित की जानी चाहिए। आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
दंडकारण्य दर्पण का सवाल: किसानों को उनकी पात्र राशि पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर और कथित रिश्वत की मांग का सामना क्यों करना पड़े? ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है, जिसमें किसान बिना किसी अवैध भुगतान के अपने अधिकारों का लाभ प्राप्त कर सकें।