नारायणपुर में जीवंत पुस्तकालय की पहल, 122 प्रतिभागियों को दिया गया प्रशिक्षण

बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने पर जोर, विद्यालयों में पठन संस्कृति को मजबूत बनाने की तैयारी

नारायणपुर में जीवंत पुस्तकालय की पहल, 122 प्रतिभागियों को दिया गया प्रशिक्षण

 

बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने पर जोर, विद्यालयों में पठन संस्कृति को मजबूत बनाने की तैयारी

 

कलेक्टर नम्रता जैन ने कहानी आधारित गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने के दिए निर्देश, शिक्षकों को पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग के लिए किया प्रेरित

नारायणपुर में जीवंत पुस्तकालय प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करने पर जोर दिया गया।

नारायणपुर, 13 अक्टूबर 2026। बच्चों में किताबों के प्रति रुचि बढ़ाने और विद्यालयों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से नारायणपुर में जीवंत पुस्तकालय उन्मुखीकरण का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला पंचायत सभाकक्ष में जनजातीय कार्य विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस प्रशिक्षण में कुल 122 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में शिक्षकों और शिक्षा दूतों को पुस्तकालय के प्रभावी संचालन तथा बच्चों में नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करने के व्यावहारिक तरीके बताए गए।

 

कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों तक रोचक और गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों की पहुंच बढ़ाना तथा विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चे अपनी रुचि से किताबें पढ़ें और सीखने के प्रति उत्सुक बनें।

 

पुस्तकालय केवल किताबें रखने की जगह नहीं

 

प्रशिक्षण के दौरान सहयोगी संस्था शिक्षार्थ ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने जीवंत पुस्तकालय की अवधारणा, उसके विभिन्न आयामों और प्रभावी संचालन की जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि पुस्तकालय का उद्देश्य केवल पुस्तकों को व्यवस्थित रखना नहीं, बल्कि बच्चों को किताबों से जोड़ना और उनमें स्वतंत्र रूप से पढ़ने की आदत विकसित करना भी है।

 

प्रशिक्षण में बच्चों तक पुस्तकों की सहज पहुंच सुनिश्चित करने, उनकी रुचि के अनुरूप पठन सामग्री उपलब्ध कराने और पढ़ने को आनंददायक गतिविधि बनाने के तरीकों पर जोर दिया गया। कहानी, चित्रों और रोचक पुस्तकों के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशीलता, भाषा कौशल तथा सीखने की जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने की रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।

 

प्रथम बुक्स की हैंगिंग लाइब्रेरी से बच्चों को मिलेगा लाभ

 

इस पहल के अंतर्गत जिला प्रशासन नारायणपुर को प्रथम बुक्स की ओर से दान स्वरूप हैंगिंग लाइब्रेरी प्राप्त हुई हैं। इन पुस्तकालयों के माध्यम से बच्चों को उनकी पहुंच में रोचक और गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

 

हैंगिंग लाइब्रेरी की अवधारणा के जरिए पुस्तकों को बच्चों के लिए अधिक सुलभ बनाने और विद्यालयों में पढ़ने के अनुकूल वातावरण तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ अन्य उपयोगी और मनोरंजक किताबें पढ़ने के लिए भी प्रेरित करना है।

 

कार्यक्रम में पीपीआईए फेलो राहुल भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान पुस्तकालयों के नियमित उपयोग और पठन गतिविधियों को विद्यालयों की दिनचर्या का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

 

कहानी सुनने से बढ़ती है बच्चों की सीखने की रुचि

 

प्रशिक्षण के दूसरे दिन आयोजित समापन सत्र में कलेक्टर नम्रता जैन, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चित्रकांत चाली ठाकुर और जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र नाथ पांडे उपस्थित रहे।

 

इस अवसर पर कलेक्टर नम्रता जैन ने बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में कहानियों और कहानी सुनने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों के साथ नियमित रूप से कहानी आधारित गतिविधियां आयोजित करने और उन्हें पुस्तकों के प्रति आकर्षित करने के निर्देश दिए।

 

उन्होंने पुस्तकालयों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने तथा बच्चों को पढ़ने, समझने और अपनी कल्पनाशीलता विकसित करने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। कहानी सुनने और पढ़ने जैसी गतिविधियां बच्चों की भाषा संबंधी समझ को मजबूत करने के साथ सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक बनाने में सहायक हो सकती हैं।

 

विद्यालयों में विकसित होगी पढ़ने की संस्कृति

 

जीवंत पुस्तकालय उन्मुखीकरण कार्यक्रम को विद्यालयों में पठन संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षकों और शिक्षा दूतों को प्रशिक्षित करने से बच्चों तक पुस्तकों की पहुंच बढ़ाने तथा पढ़ने के लिए प्रेरक वातावरण तैयार करने में मदद मिल सकती है।

 

नारायणपुर जिले में इस पहल का प्रभावी क्रियान्वयन होने पर बच्चों को पाठ्यक्रम से इतर पुस्तकों के माध्यम से नई जानकारियां हासिल करने, अपनी भाषा को बेहतर बनाने और रचनात्मक सोच विकसित करने के अवसर मिलेंगे।

 

जिला प्रशासन का जोर पुस्तकालयों को बच्चों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने और पढ़ने को सीखने की स्वाभाविक आदत बनाने पर है। इस दिशा में शिक्षकों की सक्रिय भूमिका बच्चों में किताबों के प्रति लंबे समय तक रुचि बनाए रखने में महत्वपूर्ण होगी।

 

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