बीजापुर में 6 माओवादियों ने छोड़ी हिंसा की राह, 35 लाख रुपये के इनामी कैडरों का आत्मसमर्पण

ओडिशा में सक्रिय कंपनी नंबर 08 के चार कैडर समेत पश्चिम बस्तर डिवीजन से फरार दो माओवादी पुलिस के सामने हुए पेश, पुनर्वास नीति के तहत मिलेगा नई जिंदगी शुरू करने का अवसर

बीजापुर में 6 माओवादियों ने छोड़ी हिंसा की राह, 35 लाख रुपये के इनामी कैडरों का आत्मसमर्पण

 

ओडिशा में सक्रिय कंपनी नंबर 08 के चार कैडर समेत पश्चिम बस्तर डिवीजन से फरार दो माओवादी पुलिस के सामने हुए पेश, पुनर्वास नीति के तहत मिलेगा नई जिंदगी शुरू करने का अवसर

 

दंडकारण्य दर्पण | बीजापुर, 12 अक्टूबर 2026

 

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादी संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। ओडिशा राज्य में सक्रिय चार माओवादी कैडरों सहित पश्चिम बस्तर डिवीजन के संगठन से अलग होकर फरार हुए दो माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले छह कैडरों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें चार पीपीसीएम और दो पार्टी सदस्य रैंक के कैडर शामिल हैं।

बीजापुर में 12 अक्टूबर 2026 को छह माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया।

पुलिस के मुताबिक, यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों और पुनर्वास तथा कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रभावित होकर किया गया। इस प्रक्रिया में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) बीजापुर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और बीजापुर पुलिस के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 

पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के प्रयासों का असर

 

पुलिस के अनुसार, माओवादी संगठन की हिंसक गतिविधियों, संगठनात्मक परिस्थितियों और विचारधारा से मोहभंग के साथ पूर्व माओवादी कैडरों के पुनर्वास तथा क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों ने आत्मसमर्पण के निर्णय को प्रभावित किया। सुरक्षा बलों की ओर से लगातार संपर्क और संवाद स्थापित करने के प्रयास भी इस प्रक्रिया का हिस्सा रहे।

 

प्रशासन की पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा छोड़ने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना है। बीजापुर में हुआ यह आत्मसमर्पण बस्तर क्षेत्र में शांति, विश्वास निर्माण और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

 

आत्मसमर्पण करने वाले छह कैडरों का विवरण

 

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के नाम, पद और घोषित इनाम की राशि इस प्रकार है।

 

1. रानी सोढ़ी उर्फ संध्या

 

30 वर्षीय रानी सोढ़ी बीजापुर जिले के गोरना बट्टूमपारा की निवासी बताई गई हैं। वह ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 में पीपीसीएम के पद पर सक्रिय थीं। उन पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।

 

2. पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता

 

28 वर्षीय पांडो पोड़ियम छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के ओरछा थाना क्षेत्र के नेलनार मंतूपारा की निवासी हैं। वह ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 में पीपीसीएम के पद पर कार्यरत थीं। उन पर आठ लाख रुपये का इनाम था।

 

3. सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष

 

27 वर्षीय सुक्कू कुड़ियम बीजापुर जिले के फरसेगढ़ थाना क्षेत्र के सागमेटा इमलीपारा के निवासी हैं। पुलिस विज्ञप्ति के मुताबिक, वह ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 में पीपीसीएम के पद पर कार्यरत थे और वरिष्ठ माओवादी गणेश उईका के सुरक्षा गार्ड के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके थे। उन पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।

 

4. कोसा माड़वी उर्फ सतीश

 

30 वर्षीय कोसा माड़वी बीजापुर जिले के भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के पोंडवाया के निवासी हैं। वह कंपनी नंबर 02 में पीपीसीएम तथा ए-सेक्शन कमांडर के रूप में कार्यरत थे। उन पर आठ लाख रुपये का इनाम था।

 

5. देवे मड़कम उर्फ जन्नी

 

22 वर्षीय देवे मड़कम बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र के सिंगनपल्ली स्कूलपारा की निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, वह ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 की पार्टी सदस्य रही हैं और वरिष्ठ माओवादी जगदीश इरपा उर्फ रमन्ना की सुरक्षा में भी तैनात रही थीं। उन पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित था।

 

6. लालू ताती

 

25 वर्षीय लालू ताती बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के तोड़का गायता पारा के निवासी हैं। वह गंगालूर एरिया कमेटी में पार्टी सदस्य के रूप में कार्यरत थे। उन पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।

 

लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे कैडर

 

पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले कुछ कैडर लंबे समय से माओवादी संगठन से जुड़े हुए थे। रानी सोढ़ी वर्ष 2012 से संगठन से संबंधित गतिविधियों में शामिल बताई गई हैं। बाद में उन्होंने ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 में पीपीसीएम की जिम्मेदारी संभाली।

 

पांडो पोड़ियम वर्ष 2015 में बाल संघम सदस्य के रूप में संगठन से जुड़ी थीं। दिसंबर 2025 में उन्हें पीपीसीएम पद की जिम्मेदारी दिए जाने का उल्लेख पुलिस विज्ञप्ति में है।

 

सुक्कू कुड़ियम वर्ष 2005 से संगठन से जुड़े बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, उन्होंने नेशनल पार्क एरिया कमेटी में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और बाद में ओडिशा राज्य में वरिष्ठ कैडरों की सुरक्षा से संबंधित भूमिका में रहे।

 

कोसा माड़वी वर्ष 2005 से संगठन में सक्रिय बताए गए हैं। वह कंपनी नंबर 02 में पीपीसीएम तथा ए-सेक्शन कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पुलिस विज्ञप्ति में उल्लेख है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से जनवरी 2026 में वह संगठन से अलग होकर फरार चल रहे थे।

 

देवे मड़कम वर्ष 2015 से संगठन से जुड़ी थीं। बाद में उन्हें ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 में भेजा गया, जहां उन्होंने पार्टी सदस्य और सुरक्षा गार्ड के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं।

 

लालू ताती वर्ष 2010 में बाल संघम सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े थे। बाद में वह पीएलजीए और बटालियन नंबर 01 से संबंधित जिम्मेदारियों में रहे। पुलिस के अनुसार, जनवरी-फरवरी 2026 में संगठन से अलग होने के बाद उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

 

कई घटनाओं में संलिप्तता का पुलिस ने किया उल्लेख

 

प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस ने आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों की पूर्व गतिविधियों और विभिन्न मुठभेड़ों तथा सुरक्षा बलों पर हमलों में कथित संलिप्तता का भी विवरण दिया है। इसमें ओडिशा, महाराष्ट्र और बस्तर क्षेत्र की अलग-अलग घटनाओं का उल्लेख है।

 

पुलिस के अनुसार, संबंधित कैडरों के नाम वर्ष 2006 में एनएमडीसी के सीआईएसएफ कैंप पर हमले, वर्ष 2016 में चेरली स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हमले, वर्ष 2022 में एलमागुंडा कैंप पर हमले तथा वर्ष 2024 में तेकुलगुड़ा सीआरपीएफ कैंप पर हमले जैसी घटनाओं के संदर्भ में सामने आए हैं। विज्ञप्ति में कुछ कैडरों की ओडिशा में हुई मुठभेड़ों और पुलिस अभियानों से संबंधित गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है।

 

ये विवरण पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और किसी विशिष्ट घटना में संलिप्तता से संबंधित अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होंगे।

 

पुनर्वास के तहत आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसर

 

छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले सभी छह कैडरों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पुलिस के अनुसार, इसमें आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।

 

जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से पुनर्वास की प्रक्रिया में मार्गदर्शन तथा सहयोग दिए जाने की बात भी कही गई है। इसका उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को हिंसा से दूर रखते हुए स्थायी रूप से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

 

डीआरजी, सीआरपीएफ और बीजापुर पुलिस के समन्वय की भूमिका

 

इस आत्मसमर्पण में डीआरजी बीजापुर, सीआरपीएफ की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया है। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों, संवाद और पुनर्वास के प्रति विश्वास ने कैडरों को हिंसा छोड़ने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

 

बीजापुर और आसपास के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के लिए सुरक्षा अभियान के साथ-साथ पुनर्वास और विकास संबंधी प्रयासों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छह कैडरों का आत्मसमर्पण इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है।

 

दंडकारण्य दर्पण निष्कर्ष

 

बीजापुर में छह माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण सुरक्षा, संवाद और पुनर्वास के महत्व को सामने लाता है। अब पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाली सहायता और रोजगार के अवसरों का प्रभावी क्रियान्वयन यह सुनिश्चित करने में अहम होगा कि आत्मसमर्पण करने वाले लोग हिंसा से दूर रहकर सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत कर सकें।

 

दंडकारण्य दर्पण | सच के साथ, समाज के साथ।

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