बस्तर में सहकारिता का नया अध्याय, जगदलपुर में राष्ट्रीय वर्कशॉप का शुभारंभ

सहकार से समृद्धि के राष्ट्रीय मंथन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पैक्स के डिजिटलीकरण और जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर जोर

बस्तर में सहकारिता का नया अध्याय, जगदलपुर में राष्ट्रीय वर्कशॉप का शुभारंभ

 

सहकार से समृद्धि के राष्ट्रीय मंथन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पैक्स के डिजिटलीकरण और जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर जोर

 

जगदलपुर। बस्तर की धरती पर सहकारिता के जरिए आर्थिक विकास को नई दिशा देने की पहल शुरू हुई है। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की ओर से जगदलपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशॉप का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों के सहकारिता विभागों के अधिकारी, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।

जगदलपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशॉप का शुभारंभ।

बस्तर में पहली बार इस स्तर पर आयोजित राष्ट्रीय विचार-मंथन का प्रमुख उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की आर्थिक मजबूती से जोड़ना है। सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सरकारी योजनाओं और सहकारी व्यवस्था का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी तरीके से पहुंचे।

 

अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना सहकारिता की असली कसौटी

 

भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारिता की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है, जब इसका प्रत्यक्ष लाभ जमीनी स्तर पर अंतिम छोर तक दिखाई दे। उन्होंने बस्तर में हो रहे बदलाव को सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण बताते हुए कहा कि विकास की गति अब दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच रही है।

 

उन्होंने प्राथमिक कृषि साख समितियों यानी पैक्स को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए देशभर में दो लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स स्थापित करने की दिशा में काम करने की जरूरत बताई। पैक्स के पूर्ण डिजिटलीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में उनके विस्तार और विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

 

डॉ. भूटानी ने नाबार्ड, एनसीडीसी और एनडीडीबी जैसी संस्थाओं के सहयोग से पैक्स के विविधीकरण की संभावनाओं पर चर्चा की। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे नए क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं के लिए अवसर तलाशने तथा सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

 

छत्तीसगढ़ में 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय समितियां

 

छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सहकारिता को केवल खाद और ऋण वितरण तक सीमित रखने के बजाय इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विविधीकरण, प्रसंस्करण और उत्पादों के मूल्यवर्धन का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

 

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों का गठन किया जा चुका है। डेयरी, मत्स्य पालन और लघु वनोपज जैसे क्षेत्रों में भी सहकारी व्यवस्था को विस्तार दिया जा रहा है।

 

नई समितियों को डिजिटल सुविधाओं, माइक्रो एटीएम और कॉमन सर्विस सेंटर से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर नागरिक और वित्तीय सेवाएं उपलब्ध होने के साथ समितियों की आय बढ़ाने के अवसर भी तैयार हुए हैं।

 

मक्का और गन्ना आधारित उद्योगों से बढ़ेंगे स्थानीय अवसर

 

मुख्य सचिव ने छत्तीसगढ़ में सहकारिता आधारित औद्योगिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कोंडागांव के मक्का आधारित और कवर्धा के गन्ना आधारित एथेनॉल संयंत्रों का उदाहरण दिया।

 

उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है। नेफेड, एनसीसीएफ और बीबीएसएसएल जैसी संस्थाओं के साथ समन्वय से किसानों और उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

 

तमिलनाडु ने साझा किया सहकारिता का मॉडल

 

वर्कशॉप में तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता पी. अमुधा ने राज्य के सहकारी मॉडल और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र के दिशा-निर्देशों के आधार पर तमिलनाडु ने एक, तीन और पांच वर्षीय विजन डॉक्यूमेंट के साथ विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया है।

 

सहकारी संस्थाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है, जिससे प्राथमिक समितियों के उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बाजार से जोड़ने में मदद मिल रही है।

 

बाढ़ की चुनौती के बाद राष्ट्रीय आयोजन के लिए तैयार हुआ परिसर

 

छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बस्तर की जीवटता का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले तक पूरा क्षेत्र भारी जलभराव की स्थिति से गुजर रहा था। सम्मेलन स्थल भी कई दिनों तक पानी से प्रभावित रहा।

 

इसके बावजूद जिला प्रशासन और आयोजन से जुड़ी टीम ने चुनौती को अवसर में बदलते हुए कम समय में परिसर को राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए तैयार किया। उन्होंने कहा कि बस्तर अब अपने अतीत के संघर्षों को पीछे छोड़ते हुए विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ रहा है और सहकारिता के क्षेत्र में यहां मौजूद संभावनाएं स्थानीय आजीविका को नई दिशा दे सकती हैं।

 

सहकारी उत्पादों के लगाए गए स्टॉल

 

राष्ट्रीय वर्कशॉप के शुभारंभ के दौरान देश में सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। सम्मेलन परिसर में विभिन्न सहकारी समितियों और संस्थाओं की ओर से उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं।

 

दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अधिकारी अपने अनुभव और सफल मॉडल साझा करेंगे। साथ ही सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उपायों और सहकारी संस्थाओं को नए क्षेत्रों से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

 

बस्तर से देश को सहकारिता का नया संदेश

 

बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर आकाश छिकारा, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिव एवं पंजीयक तथा सहकारी संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह राष्ट्रीय सम्मेलन सहकारिता को ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

जगदलपुर में हो रहा यह दो दिवसीय मंथन देशभर में सहकार से समृद्धि के संकल्प को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और दूरदराज के क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नई दिशा तय कर सकता है।

 

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