
भाजपा में आदिवासी नेता के इस्तीफे से हलचल, कोमल हुपेण्डी ने छोड़ी पार्टी
वैचारिक कारणों का हवाला देकर प्राथमिक सदस्यता और सभी दायित्वों से दिया इस्तीफा, जल जंगल जमीन और आदिवासी मुद्दों पर अभियान जारी रखने की बात
रायपुर कांकेर। भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष कोमल हुपेण्डी ने रविवार 27 सितंबर 2026 को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और पार्टी के सभी दायित्वों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को भेजा है। इस्तीफे के बाद पार्टी के आदिवासी संगठन से जुड़े राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
कोमल हुपेण्डी ने अपने इस्तीफे में बताया कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने इंडिया गठबंधन और कांग्रेस के खिलाफ काम करते हुए भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद उन्होंने पार्टी संगठन के साथ-साथ कांकेर और कोरबा लोकसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में भी यथासंभव काम किया।
संगठन में मिली थी जिम्मेदारी
भाजपा में संगठन विस्तार के दौरान कोमल हुपेण्डी को अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा है कि अब वैचारिक कारणों से वह पार्टी की ओर से दिए गए दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने प्राथमिक सदस्यता सहित सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया।
जल जंगल जमीन के मुद्दों पर अभियान जारी रखने की बात
पार्टी से इस्तीफा देने के साथ ही कोमल हुपेण्डी ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर उनका काम जारी रहेगा। उन्होंने जल जंगल जमीन, आदिम सांस्कृतिक परंपराओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे विषयों को लेकर अपना अभियान आगे भी जारी रखने की बात कही है।
वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का जताया आभार
इस्तीफे में कोमल हुपेण्डी ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के प्रति आभार भी व्यक्त किया है। उन्होंने पार्टी में रहते हुए मिले सहयोग और जिम्मेदारियों के लिए धन्यवाद दिया।
इस्तीफे की प्रतिलिपि अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष को
कोमल हुपेण्डी ने अपने इस्तीफा पत्र की प्रतिलिपि भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण सिंह को भी भेजी है। उनका इस्तीफा 27 सितंबर 2026 की तारीख का है।
इस्तीफे के पीछे के कारणों पर स्थिति स्पष्ट नहीं
कोमल हुपेण्डी ने इस्तीफे के पीछे वैचारिक कारणों का उल्लेख किया है, लेकिन अपने पत्र में इन कारणों की विस्तृत जानकारी नहीं दी है। ऐसे में उनके इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजह को लेकर फिलहाल आधिकारिक रूप से कोई अतिरिक्त जानकारी सामने नहीं आई है।