CG: रावतपुरा फेस-2 से पूरे छत्तीसगढ़ तक सख्ती का संदेश, बिना नक्शे के निर्माण पर अब नहीं चलेगी सेटिंग

रायपुर में करीब 40 मकानों को नोटिस के बाद बुलडोजर कार्रवाई, प्रदेश के सभी जिलों में अवैध निर्माण की जांच और कार्रवाई की तैयारी

 

प्रधान संपादक- बिन्देश पात्र

रायपुर। राजधानी रायपुर के रावतपुरा फेस-2 कॉलोनी में बिना नक्शा पास कराए बनाए गए मकानों के खिलाफ नगर निगम और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने प्रदेशभर में अवैध निर्माण को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 40 मकानों को नोटिस जारी किए जाने के बाद निगम की टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची। पुलिस बल की मौजूदगी में शुरू हुई इस कार्रवाई को भवन निर्माण नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की सख्ती से जोड़कर देखा जा रहा है।

रावतपुरा फेस-2 में सामने आए मामले के अनुसार कई मकानों के निर्माण को लेकर स्वीकृत नक्शे और जरूरी अनुमति से संबंधित सवाल उठे हैं। नगर निगम की ओर से संबंधित मकान मालिकों को पहले नोटिस जारी किया गया था। नोटिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निगम का अमला कार्रवाई के लिए पहुंचा। मौके पर अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पुलिस की टीम भी मौजूद रही।

 

इस कार्रवाई का सबसे बड़ा संदेश राजधानी तक सीमित नहीं रहने वाला है। प्रदेश में बिना स्वीकृति, बिना नक्शा अथवा भवन निर्माण नियमों के विपरीत किए जा रहे निर्माणों की जांच को लेकर अब सभी जिलों में कार्रवाई की बात सामने आ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में पुराने और नए निर्माणों की जांच तेज होने की संभावना है।

 

सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि भवन निर्माण से जुड़े नियम सभी लोगों पर समान रूप से लागू हों। प्रभावशाली व्यक्ति हो या सामान्य नागरिक, नियमों के उल्लंघन की स्थिति में प्रक्रिया के तहत कार्रवाई हो, यही इस अभियान का मूल उद्देश्य माना जा रहा है। कार्रवाई के दौरान संबंधित लोगों को नियमानुसार अपना पक्ष रखने और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया जाना जरूरी होगा।

 

प्रदेश के अलग-अलग शहरों में बिना अनुमति निर्माण, स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण, सरकारी अथवा सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण और भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। रावतपुरा फेस-2 की कार्रवाई के बाद अब ऐसे मामलों में प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की जांच और कार्रवाई को लेकर निगाहें टिक गई हैं।

 

सेटिंग नहीं, दस्तावेज और नियम होंगे आधार

 

इस पूरी कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि किसी भी निर्माण के खिलाफ कार्रवाई केवल शिकायत या आरोप के आधार पर नहीं, बल्कि नियमानुसार जांच और दस्तावेजों के आधार पर हो। यदि निर्माण अवैध पाया जाता है तो संबंधित निकाय कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है। वहीं वैध दस्तावेज रखने वाले भवन मालिकों को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार रहेगा।

 

रावतपुरा फेस-2 में हुई कार्रवाई से प्रदेश के अन्य जिलों में भी यह संदेश जा सकता है कि भवन निर्माण के नियमों की अनदेखी करने वालों पर स्थानीय स्तर पर जांच बढ़ाई जा सकती है। यदि सभी जिलों में अभियान चलाया जाता है तो इसका दायरा केवल मकानों तक सीमित न रहकर व्यावसायिक भवनों और अन्य निर्माणों तक भी पहुंच सकता है।

 

अब नजर इस बात पर रहेगी कि रावतपुरा फेस-2 की कार्रवाई के बाद प्रदेश के अन्य जिलों में प्रशासन किस स्तर पर अभियान शुरू करता है और कितने ऐसे निर्माणों की पहचान होती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव न हो।

 

रायपुर की इस कार्रवाई ने फिलहाल एक बड़ा सवाल सामने रख दिया है कि यदि पूरे छत्तीसगढ़ में भवन निर्माण नियमों की जांच होती है, तो कितने निर्माण जांच के दायरे में आएंगे और कितनों के पास वैध नक्शा तथा आवश्यक अनुमति मौजूद है।

 

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