
स्कूल केईन्ता अभियान से 2 हजार से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े, 34 नई वैकल्पिक शालाएं शुरू
दुर्गम टेकमेटा गांव में 10 बच्चों के लिए शुरू हुई वैकल्पिक शाला, स्थानीय युवा को बनाया गया शिक्षा दूत
नारायणपुर, 25 अगस्त 2026 // कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जिले के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में बच्चों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संचालित स्कूल केईन्ता अभियान के तहत अब तक 2 हजार से अधिक बच्चों का नामांकन कराया जा चुका है। अभियान के अंतर्गत दुर्गम क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक शालाएं शुरू की गई हैं। इसी क्रम में ओरछा विकासखंड के टेकमेटा गांव में मुख्य विद्यालय की दूरी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से प्रभावित 10 बच्चों के लिए वैकल्पिक शाला प्रारंभ की गई है।
स्कूल केईन्ता अभियान के तहत संकुल समन्वयक बीर सिंह कोवाची एवं उनकी टीम ने नदी और दुर्गम रास्तों को पार कर टेकमेटा गांव पहुंचकर बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का सर्वे किया। सर्वे के दौरान 10 ऐसे बच्चों को चिन्हांकित किया गया, जो मुख्य विद्यालय की अधिक दूरी एवं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नियमित रूप से विद्यालय नहीं जा पा रहे थे।
बच्चों की शिक्षा में आ रही इस बाधा को देखते हुए ग्रामीणों ने गांव में ही वैकल्पिक शाला प्रारंभ करने की मांग रखी। ग्रामीणों की मांग एवं बच्चों की शैक्षणिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए टेकमेटा में वैकल्पिक शाला का शुभारंभ किया गया। इसमें चिन्हांकित सभी 10 बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया गया है। शाला के सुचारू संचालन के लिए गांव के स्थानीय युवा साधु राम गोटा को शिक्षा दूत का दायित्व सौंपा गया है।
वैकल्पिक शाला शुरू होने से अब इन बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर स्थित मुख्य विद्यालय तक कठिन रास्तों से होकर नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें अपने ही गांव में नियमित रूप से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
स्कूल केईन्ता अभियान के तहत अब तक 2 हजार से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है और दुर्गम क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक शालाएं शुरू की गई हैं। इन शालाओं के माध्यम से उन क्षेत्रों में बच्चों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मुख्य विद्यालय तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है।
टेकमेटा में शुरू हुई वैकल्पिक शाला इसी अभियान की एक महत्वपूर्ण पहल है। जिला प्रशासन द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों के चिन्हांकन, नामांकन एवं स्थानीय स्तर पर शिक्षा की व्यवस्था का कार्य लगातार जारी है, ताकि भौगोलिक दूरी और दुर्गम परिस्थितियां किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बनें।