
छोटेडोंगर में धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस
अमर शहीदों को नमन के साथ शुरू हुआ आयोजन, पारंपरिक वेशभूषा में निकली भव्य रैली
संवाददाता बोधन नाग
नारायणपुर/छोटेडोंगर
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर में 84 परगना सर्व आदिवासी समाज की ओर से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत साप्ताहिक बाजार स्थल पर अमर शहीदों के छायाचित्र पर पूजा-अर्चना और ध्वजारोहण के साथ हुई। इसके बाद सैकड़ों लोगों ने नगर के प्रमुख मार्गों से रैली निकालकर जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लिया।
ध्वजारोहण के बाद निकली रैली में बड़ी संख्या में समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। पुरुष सफेद परिधान के साथ मोरपंख और सींग से सजे मुकुट पहने हुए मांदर की थाप पर नृत्य करते नजर आए। वहीं महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में लंबी कतार बनाकर रैली में हिस्सा लिया। रैली छोटेडोंगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस बाजार स्थल पहुंची।
इसके बाद बाजार स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को मंच पर आमंत्रित कर तिलक लगाया गया तथा पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान आदिवासी युवक-युवतियों ने डांडा और गोंडी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। मांदर और ढोल की थाप पर कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से प्रभावित होकर भाजपा जिलाध्यक्ष संध्या पवार, छोटेडोंगर के उपसरपंच संतोष बैठारू सहित स्थानीय नागरिकों ने मंच पर पहुंचकर कलाकारों को नगद राशि देकर प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में समाज के वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति ही उसकी पहचान है। आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण करता आया है। वर्तमान समय में आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ना बेहद जरूरी है। वक्ताओं ने समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
आदिवासी अधिकारों के प्रति जागरूकता का दिवस
विश्व आदिवासी दिवस हर वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1994 में 9 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस के रूप में घोषित किया था। 9 अगस्त 1982 को संयुक्त राष्ट्र में पहली बार आदिवासी समुदायों के मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर के आदिवासी समुदायों की संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
कार्यक्रम के दौरान बस्तर की लोक कला और हस्तशिल्प का भी प्रदर्शन किया गया। पूरे दिन छोटेडोंगर का बाजार स्थल आदिवासी संस्कृति, परंपरा और गौरव के रंग में रंगा रहा।