
दंडकारण्य दर्पण
55 अतिथि शिक्षक बेरोजगार, फंड विवाद पर बवाल; सर्व आदिवासी समाज आया समर्थन में, डीईओ बोले– समीक्षा के बाद मिलेगा दोबारा मौका
सीनियरिटी और शिक्षकों की जरूरत के आधार पर होगी पुनः पदस्थापना, जिला शिक्षा अधिकारी का दावा
नारायणपुर। जिले में 55 अतिथि शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को सेवा से मुक्त किए जाने का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। नौकरी छिनने से बेरोजगार हुए शिक्षकों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और लगातार कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी नियुक्ति बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच सर्व आदिवासी समाज भी उनके समर्थन में उतर आया है और प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और स्कूलों में सेवाएं देने के बाद उन्हें फंड की कमी का हवाला देकर हटा दिया गया। उनका कहना है कि पहले रोजगार देना और फिर कुछ दिनों बाद सेवा समाप्त कर देना युवाओं के साथ अन्याय है। प्रभावित शिक्षकों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
मामले में सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष ने कहा कि यदि वास्तव में फंड की कमी थी तो भर्ती प्रक्रिया शुरू ही नहीं की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि समाज इस मुद्दे को जिला प्रशासन के सामने मजबूती से उठाएगा और प्रभावित युवाओं को उनका अधिकार दिलाने का प्रयास करेगा।
वहीं, दंडकारण्य दर्पण से चर्चा में जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र पांडे ने बताया कि जिन अतिथि शिक्षकों को कार्यमुक्त किया गया है, उनके मामले की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में नियमित शिक्षकों की पदस्थापना हो गई है, वहां से अतिथि शिक्षकों को मुक्त किया गया है। अब पूरे जिले में शिक्षकों की आवश्यकता वाले स्कूलों का पुनः आकलन किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां शिक्षकों की कमी होगी, वहां सीनियरिटी और पात्रता के आधार पर अतिथि शिक्षकों को दोबारा अवसर दिया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि किसी भी पात्र शिक्षक के साथ अन्याय न हो और आवश्यकता के अनुसार नियमानुसार पुनः पदस्थापना की जाए।
अब जिले के बेरोजगार हुए अतिथि शिक्षकों की निगाहें प्रशासन की समीक्षा प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।