
नक्सल मुक्ति के बाद अब मलेरिया मुक्ति की मांग, उफनती कोटरी नदी नाव से पार कर कलेक्टर-एसपी पहुंचे ग्रामीणों के बीच
कांकेर, 4 अगस्त। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड के सुदूर और संवेदनशील ग्रामीण इलाकों में इन दिनों मलेरिया का प्रकोप चिंता का विषय बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश और नदी-नालों के उफान के बीच प्रशासनिक टीम ने जोखिम उठाकर प्रभावित गांवों का दौरा किया। कलेक्टर निलेश कुमार क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक निखिल रखेचा, जिला पंचायत सीईओ हरीश मंडावी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तथा जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा के सीईओ उदय नाग ने ग्राम पंचायत कंडाड़ी, सीतरम, आलदंड और बांगोघोड़िया सहित प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीणों से मुलाकात की और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
बेचाघाट में कोटरी नदी उफान पर होने के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित था। इसके बावजूद अधिकारियों ने मोटर बोट के जरिए नदी पार कर गांवों तक पहुंचकर बीमार ग्रामीणों से मुलाकात की। मलेरिया से पीड़ित लोगों की स्थिति जानने के बाद गंभीर मरीजों को तत्काल पाखंजूर अस्पताल भेजने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने तथा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
हाल के दिनों में ग्रामीण इलाकों में मलेरिया से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं। इस स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में नदी उफान पर होने से स्वास्थ्य कर्मचारियों का गांवों तक नियमित पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता। उन्होंने मांग की कि स्थानीय युवतियों और युवाओं को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़कर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था गांवों में ही मजबूत की जाए, ताकि आपात स्थिति में लोगों को तत्काल राहत मिल सके।
प्रशासन ने कोटरी नदी में लोगों की आवाजाही और स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए मोटर बोट की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने सरपंच, सचिव और ग्रामीणों के साथ बैठक कर मलेरिया नियंत्रण, दवा वितरण, स्वास्थ्य जांच और जागरूकता अभियान को तेज करने के निर्देश दिए।
हालांकि खैरीपदर और आसपास के कुछ गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया गया, लेकिन नदी-नालों का जलस्तर अत्यधिक बढ़ जाने के कारण प्रशासनिक दल वहां नहीं पहुंच सका। अधिकारियों ने मौसम सामान्य होते ही उन गांवों का भी दौरा करने और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र ने वर्षों तक नक्सल हिंसा का सामना किया, वहां अब सबसे बड़ी जरूरत बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और मलेरिया से स्थायी मुक्ति की है। प्रशासन का यह दौरा केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा नहीं, बल्कि दूरस्थ आदिवासी अंचलों तक शासन की पहुंच और संवेदनशीलता का भी महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।