
दण्डकारण्य दर्पण
संत रविदास के समरसता और समानता के विचार विकसित भारत की आधारशिला : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर, 4 अगस्त। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कलश वंदन महाअभियान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संत रविदास का जीवन समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का अमर संदेश है। उनके विचार आज भी समाज को एकजुट करने और विकसित भारत के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र मिट्टी और जल से भरे कलश का श्रद्धापूर्वक वंदन किया। उन्होंने संत रविदास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर पूजा-अर्चना की और सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपते हुए गांव-गांव तक समरसता का संदेश पहुंचाने के लिए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मुख्यमंत्री ने संत रविदास के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में संत रविदास जयंती के अवसर पर माघी पूर्णिमा के दिन पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन राज्यभर में मांस एवं मदिरा की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। इसके साथ ही राज्य स्थापना दिवस पर दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत रविदास के नाम से एक नया सम्मान स्थापित किया जाएगा तथा नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण भी उनके नाम पर किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश “ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न, छोट-बड़ो सब सम बसैं” को विधानसभा भवन में अंकित कराने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत संतों और महापुरुषों की भूमि रही है। जब-जब समाज में भेदभाव, छुआछूत और अन्याय बढ़ा, तब-तब संतों ने समाज को नई दिशा दी। संत रविदास ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं बल्कि उसके कर्म, भक्ति और सदाचार से होती है। उनका संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज भी समाज को आंतरिक शुद्धता, समानता और मानवता का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, संत परंपरा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संत रविदास की जन्मस्थली से लाया गया पवित्र कलश पूरे प्रदेश के गांवों और आस्था केंद्रों तक पहुंचेगा, जिससे सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि संत रविदास का जीवन सर्वसमाज को जोड़ने की प्रेरणा देता है। वहीं अजय जामवाल ने समरसता को भारत की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए संतों के विचारों को समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया। सरोज पाण्डेय ने कहा कि संत रविदास के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और सामाजिक समानता के लिए उनका संदेश आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विभिन्न विधायक, जनप्रतिनिधि, संत समाज के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। यह आयोजन सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।