
दंडकारण्य दर्पण
संत रविदास जयंती पर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश, मांस और मदिरा दुकानें भी रहेंगी बंद: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर, 4 अगस्त। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में संत रविदास जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन पूरे राज्य में मांस और मदिरा की दुकानें भी बंद रहेंगी ताकि संत रविदास जी के विचारों के अनुरूप सामाजिक सद्भाव, पवित्रता और सम्मान का वातावरण बन सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत रविदास जी के नाम पर एक नया राज्य स्तरीय सम्मान स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा नया रायपुर के एक प्रमुख चौक का नाम संत रविदास चौक रखा जाएगा तथा छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन में संत रविदास जी का प्रेरणादायी संदेश भी अंकित किया जाएगा, जिससे जनप्रतिनिधि और आने वाली पीढ़ियां उनके विचारों से प्रेरणा ले सकें।
संत रविदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी के समीप स्थित सीर गोवर्धनपुर में 15वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। उनका जन्म उस समाज में हुआ था जिसे उस समय सामाजिक भेदभाव और छुआछूत का सामना करना पड़ता था। कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत करने के बावजूद उन्होंने अपने कर्म, भक्ति और विचारों से यह सिद्ध किया कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति नहीं बल्कि उसके कर्म और चरित्र से होती है।
संत रविदास जी ने अपना पूरा जीवन सामाजिक समरसता, समानता, प्रेम, भाईचारे और मानव सेवा के लिए समर्पित किया। उन्होंने जाति-पांति, ऊंच-नीच और भेदभाव का खुलकर विरोध किया तथा समाज को यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य ईश्वर की संतान हैं और सभी को समान सम्मान मिलना चाहिए। उनके प्रसिद्ध विचार “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज भी लोगों को आंतरिक पवित्रता, ईमानदारी और सदाचार का संदेश देते हैं।
उन्होंने ऐसे समाज की कल्पना की थी जहां किसी के साथ भेदभाव न हो, कोई भूखा न रहे, किसी के साथ अन्याय न हो और हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिले। उनके विचार केवल किसी एक समाज तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे संपूर्ण मानव समाज के कल्याण की भावना से प्रेरित थे। इसी कारण संत रविदास जी को सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों का महान संत माना जाता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संत रविदास जी के आदर्श आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे। उन्होंने प्रदेशवासियों से संत रविदास जी के विचारों को अपने जीवन में अपनाने, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने, भेदभाव समाप्त करने तथा सेवा, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं को संत रविदास जी के विचारों के सम्मान और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इनके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को संत रविदास जी के जीवन, संघर्ष और मानवता के संदेश से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।