CG: भाजपा सरकार पर शिव डहरिया का हमला, पेपर लीक, गौधाम योजना और यूसीसी पर साधा निशाना

छात्रों की समस्याओं का समाधान करने में सरकार विफल, गौ संरक्षण और यूसीसी पर भी उठाए सवाल

भाजपा सरकार पर शिव डहरिया का हमला, पेपर लीक, गौधाम योजना और यूसीसी पर साधा निशाना

छात्रों की समस्याओं का समाधान करने में सरकार विफल, गौ संरक्षण और यूसीसी पर भी उठाए सवाल

रायपुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने प्रदेश और देश के विभिन्न मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पेपर लीक, छात्रों के आंदोलन, गौधाम योजना और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।

शिव डहरिया ने कहा कि प्रदेश में पीएससी घोटाले के नाम पर भ्रम की स्थिति बनाई गई, जबकि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। उनका आरोप है कि जिस स्तर पर प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं, वहीं से पेपर लीक हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे हैं तथा पेपर बेचने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए।

उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली से लेकर रायपुर तक छात्र आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय विरोध प्रदर्शन को रोकने में लगी हुई है।

गौधाम योजना पर टिप्पणी करते हुए शिव डहरिया ने कहा कि भाजपा सरकार ने कांग्रेस शासनकाल की गौठान योजना का केवल नाम बदलकर गौधाम योजना कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्य नहीं हो रहा है और राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में गौवंश दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, जिससे सरकार के दावों की वास्तविकता सामने आती है।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा। डहरिया ने कहा कि भाजपा समाज को बांटने की राजनीति कर रही है। उनका कहना था कि भारत विविध धार्मिक, सांस्कृतिक और जनजातीय परंपराओं वाला देश है, जहां विवाह से लेकर अंतिम संस्कार तक अलग-अलग रीति-रिवाज हैं। ऐसे में सभी पर एक समान कानून लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान पहले से ही सभी नागरिकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को राजनीतिक विवादों के बजाय छात्रों की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।

Exit mobile version