
अबूझमाड़ के अलवर गांव में विकास की राह अब भी अधूरी
जिला मुख्यालय से सिर्फ 17 किलोमीटर दूर बसे 20 परिवार आज भी सड़क, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित
दंडकारण्य दर्पण
नारायणपुर। एक ओर केंद्र और राज्य सरकार अबूझमाड़ क्षेत्र के विकास के लिए नियद नेल्लानार योजना, धरतीआबा अभियान, स्कूल केंता सहित अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय से महज 17 किलोमीटर दूर स्थित कंदाड़ी ग्राम पंचायत का आश्रित गांव अलवर आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। लगभग 20 परिवारों वाला यह गांव विकास की मुख्यधारा से अब भी दूर नजर आता है।
घने जंगलों के बीच बसे अलवर गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है। गांव में बिजली की सुविधा नहीं होने से ग्रामीण अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। बच्चों की शिक्षा के लिए न स्कूल है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र। इसके कारण अधिकांश बच्चे नियमित शिक्षा से वंचित हैं और गांव में अशिक्षा की समस्या बनी हुई है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का भी गांव में पूरी तरह अभाव है। किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ने पर प्राथमिक उपचार के लिए भी अस्पताल उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी की स्थिति में आज भी उन्हें पारंपरिक उपचार और सिरहा-बैगा पर निर्भर रहना पड़ता है। गंभीर मरीजों को पैदल या अन्य साधनों से लंबी दूरी तय कर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शासन की कई योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और उनका लाभ गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है। उनका कहना है कि अब तक किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने गांव का दौरा कर वास्तविक स्थिति का जायजा नहीं लिया है। यही कारण है कि वर्षों बाद भी गांव की बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तो अलवर जैसे गांवों की तस्वीर बदल सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क, बिजली, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।