
दुर्गम कोहकापार में पहली बार जली शिक्षा की लौ
कलेक्टर नम्रता जैन बाइक से नदी, पहाड़ और जंगल पार कर पहुंचीं गांव, पहली प्राथमिक शाला का किया शुभारंभ
नारायणपुर, 17 जुलाई 2026। अबूझमाड़ के दुर्गम ग्राम कोहकापार में पहली बार शिक्षा की शुरुआत हुई है। जिला प्रशासन के ‘स्कूल केइंता’ अभियान के तहत गांव में पहली प्राथमिक शाला खोली गई। जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव तक कलेक्टर नम्रता जैन बाइक से नदी-नाले, पहाड़ और जंगलों का कठिन रास्ता तय कर पहुंचीं और विद्यालय का शुभारंभ किया।
कोहकापार में अब तक कोई स्कूल नहीं था, जिससे बच्चे शिक्षा से वंचित थे। घर-घर किए गए शैक्षणिक सर्वेक्षण के आधार पर गांव में प्राथमिक शाला शुरू की गई। पहले ही दिन 21 बच्चों का प्रवेश हुआ, जिनमें 11 छात्राएं और 10 छात्र शामिल हैं।
कलेक्टर ने बच्चों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और उन्हें स्कूल बैग तथा पाठ्यपुस्तकें वितरित कीं। उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से स्कूल आने और मन लगाकर पढ़ाई करने की अपील की। इस दौरान उन्होंने स्वयं कक्षा लेकर बच्चों को पढ़ाया और शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दिया।
कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि ‘स्कूल केइंता’ अभियान के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान की जा रही है जो कभी स्कूल नहीं गए या पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। उन्हें विद्यालयों और छात्रावासों से जोड़ा जा रहा है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। अभियान के तहत अब तक जिले के 2,000 से अधिक बच्चों का शासकीय विद्यालयों और छात्रावासों में प्रवेश कराया जा चुका है।
विद्यालय के शुभारंभ के बाद कलेक्टर ने ‘माड़ संवाद’ कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों से चर्चा कर शिक्षा, आंगनबाड़ी, पोषण, स्वास्थ्य और शासकीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने गर्भवती महिलाओं, बच्चों की नियमित उपस्थिति और पोषण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों को आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
ग्राम पंचायत के सरपंच मनु ध्रुव ने गांव में नल-जल योजना, बिजली, मोबाइल टावर और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग रखी। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
कोहकापार में प्राथमिक शाला की स्थापना ‘स्कूल केइंता’ अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। प्रशासन का मानना है कि इससे अबूझमाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए शिक्षा के नए द्वार खुलेंगे और उनका भविष्य बेहतर होगा।