CG News: नियद नेल्लानार योजना से नारायणपुर के वनांचल गांवों में पहुंची बिजली, दशकों बाद रोशन हुए आदिवासी परिवारों के घर

मोहन्दी और मसपुर के 45 परिवारों तक पहुंची बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

 

 

 

दंडकारण्य दर्पण

 

नारायणपुर जिले के सुदूर वनांचल में बसे ग्राम मोहन्दी और मसपुर के आदिवासी परिवारों के लिए वर्ष 2026 नई उम्मीद और बदलाव लेकर आया है। वर्षों तक लालटेन और ढिबरी की रोशनी में जीवन बिताने वाले इन गांवों के घर अब बिजली की रोशनी से जगमगा उठे हैं। राज्य सरकार की नियद नेल्लानार योजना के तहत इन दुर्गम क्षेत्रों तक पहली बार विद्युत सुविधा पहुंचाई गई है।

घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद ग्राम मोहन्दी के मिचिंगपारा, कोडियारपारा और बीचपारा तथा ग्राम मसपुर के गुडरापारा तक बिजली पहुंचाने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और निर्माण एजेंसी ने निर्धारित समय में विद्युत लाइन विस्तार का कार्य पूरा किया।

 

इस परियोजना के तहत ग्राम मोहन्दी में लगभग 61.79 लाख रुपये की लागत से तीनों पाराओं में विद्युत विस्तार किया गया, जिससे 40 परिवारों को पहली बार बिजली का लाभ मिला। वहीं ग्राम मसपुर के गुडरापारा में 22.42 लाख रुपये की लागत से कार्य पूरा कर पांच परिवारों को विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराया गया।

 

बिजली पहुंचने के साथ ही इन गांवों में विकास की नई संभावनाएं खुल गई हैं। अब बच्चों की पढ़ाई रात के समय भी सुचारु रूप से हो सकेगी। मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य घरेलू विद्युत उपकरणों का उपयोग ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार होगा और भविष्य में छोटे उद्योग, सिलाई, कुटीर व्यवसाय तथा अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

 

ग्रामीणों ने वर्षों बाद अपने घरों में बिजली जलते देख खुशी जताई और इसे अपने जीवन का ऐतिहासिक पल बताया। उन्होंने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।

 

नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सरकार का उद्देश्य केवल गांवों तक बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि वनांचल के अंतिम छोर तक विकास की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराकर आदिवासी समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। प्रशासन अब जिले के अन्य वंचित गांवों तक भी चरणबद्ध तरीके से विकास की यह रोशनी पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

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