CG News: कम बारिश की आशंका के बीच सरकार की किसानों से अपील, धान की सीधी बुवाई और वैकल्पिक फसलों पर दें जोर

अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने जारी की आकस्मिक कार्ययोजना, डीएसआर तकनीक अपनाने और दलहनी-तिलहनी फसलों की खेती की दी सलाह।

 

रायपुर। खरीफ सीजन 2026 में अल-नीनो के संभावित प्रभाव और सामान्य से कम वर्षा की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के लिए व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में तैयार इस योजना का उद्देश्य कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों की फसल सुरक्षित रखना, उत्पादन बनाए रखना और खेती की लागत कम करना है।

कृषि विभाग ने किसानों से धान की पारंपरिक रोपा पद्धति के बजाय डायरेक्ट सीडेड राइस यानी डीएसआर तकनीक अपनाने की अपील की है। विभाग के अनुसार इस तकनीक से लगभग 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, प्रति एकड़ करीब पांच हजार रुपये तक लागत कम आती है और फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।

सरकार ने किसानों को वर्षा शुरू होने से पहले खेतों की तैयारी, मेड़बंदी और वर्षा जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। कम बारिश की स्थिति को देखते हुए ऊंची भूमि में धान के स्थान पर अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल और सोयाबीन जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती करने की सिफारिश की गई है। इन फसलों में कम पानी की आवश्यकता होती है और सूखे की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहती है।

कृषि विभाग ने बीज उपचार को अनिवार्य बताते हुए किसानों को वैज्ञानिक तरीके से बीज तैयार करने की सलाह दी है। यदि 15 जुलाई तक पर्याप्त अंकुरण नहीं होता है तो दोबारा बुवाई के समय सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। साथ ही जुलाई के अंत तक मूंग और उड़द तथा अगस्त में तिल, सूरजमुखी और मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने का सुझाव भी दिया गया है।

उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी सरकार ने जोर दिया है। कम वर्षा की स्थिति में नैनो यूरिया, पर्णीय छिड़काव और वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी गई है ताकि फसल पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़े और उत्पादन बेहतर बना रहे।

सरकार ने किसानों से गांवों में वर्षा जल संग्रहण, अस्थायी बांध निर्माण, तालाबों और डबरियों में पानी संचित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसी पानी का सिंचाई में उपयोग करने की अपील की है। इसके साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीक अपनाने, मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है।

कृषि विभाग ने किसानों से किसी भी तकनीकी समस्या या मार्गदर्शन की आवश्यकता होने पर निकटस्थ कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केंद्र अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह लेने की अपील की है। सरकार का मानना है कि समय रहते वैज्ञानिक खेती अपनाकर कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों को नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

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