CG News: 12 परिवारों को गांव से निकाले जाने’ की खबर निकली भ्रामक, खड़कागांव के ग्रामीणों ने बताई पूरी सच्चाई

धर्मांतरण विवाद के बीच सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक जानकारी का ग्रामीणों ने किया खंडन, प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में दो परिवारों की पारंपरिक रीति-रिवाजों में वापसी का दावा।

दंडकारण्य दर्पण

 

 

धर्मांतरण विवाद के बीच सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों का ग्रामीणों ने किया खंडन, प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में दो परिवारों के पारंपरिक रीति-रिवाजों में लौटने का दावा

 

नारायणपुर। जिले के ग्राम खड़कागांव में धर्मांतरण विवाद को लेकर एक बार फिर माहौल गर्म हो गया। मंगलवार को गांव में दो पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनने पर जिला प्रशासन और पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े। एहतियात के तौर पर गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखी। इस बीच सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हुई कि गांव से 12 धर्मांतरित परिवारों को बाहर निकाल दिया गया है। हालांकि ग्रामीणों ने इस दावे को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है।

 

ग्रामीणों के अनुसार खड़कागांव पंचायत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लगभग 13 परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया था। इस विषय को लेकर गांव में लगातार चर्चा चल रही थी। हाल ही में पंचायत स्तर पर बैठक आयोजित कर संबंधित परिवारों से आदिवासी समाज की पारंपरिक रीति-रिवाज, संस्कृति और देवी-देवताओं के सम्मान के साथ गांव में रहने की अपील की गई। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सामाजिक परंपराओं और सामुदायिक व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई थी।

 

ग्रामीणों का कहना है कि जिस परिवार को लेकर विवाद सामने आया, वह मूल रूप से खड़कागांव का निवासी नहीं है। बताया गया कि उक्त परिवार दूसरे गांव से आकर यहां बस गया था और उसे गांव में रहने के लिए स्थान भी दिया गया था। ग्रामीणों के अनुसार परिवार के एक सदस्य को गांव के माता मंदिर से जुड़े पारंपरिक कार्यों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। बाद में परिवार ने धर्म परिवर्तन कर लिया, जिसके बाद गांव में मतभेद की स्थिति बनने लगी।

ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत ने संबंधित परिवार को कई बार समझाइश दी और अपनी पारंपरिक संस्कृति तथा रीति-रिवाजों को पुनः अपनाने का आग्रह किया। इसी दौरान एक परिवार का सामान घर से बाहर निकाले जाने की घटना भी सामने आई, जिससे विवाद और बढ़ गया। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इसे पूरे गांव से कई परिवारों को निकालने की घटना के रूप में प्रस्तुत करना गलत है।

 

गांव के लोगों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर 12 परिवारों को गांव से निकाले जाने की जो खबरें प्रसारित की जा रही हैं, वे पूरी तरह भ्रामक हैं। उनका कहना है कि ऐसा कोई सामूहिक निष्कासन नहीं हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन, पुलिस और गांव के वरिष्ठ लोगों की मौजूदगी में बातचीत के बाद दो परिवारों ने स्वेच्छा से पुनः अपनी पारंपरिक आदिवासी संस्कृति और रीति-रिवाजों को स्वीकार करने की बात कही। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित परिवारों ने स्वयं गांव के साथ मिलकर रहने और स्थानीय परंपराओं का सम्मान करने की इच्छा जताई।

 

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने इतना जरूर कहा है कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

 

मामले को देखते हुए पुलिस बल अब भी गांव में तैनात है और अधिकारियों द्वारा लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है। प्रशासन दोनों पक्षों से संवाद स्थापित कर शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है ताकि किसी प्रकार का तनाव दोबारा उत्पन्न न हो।

 

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली अपुष्ट अथवा भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें। किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें तथा केवल प्रशासन और पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और प्रशासन शांति एवं सौहार्द बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है।

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