
दण्डकारण्य दर्पण विशेष
पेट्रोलियम संकट की आंच से जूझ रही दुनिया, भारत समेत कई देशों पर बढ़ा दबाव
Nai Delhi /वैश्विक डेस्क। अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। भारत भी उन देशों में शामिल है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करते हैं। रिपोर्टों के अनुसार भारत अपनी तेल आवश्यकता का अधिकांश भाग विदेशों से मंगाता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, परिवहन और महंगाई पर पड़ता है।
भारत में जून 2026 के दौरान पेट्रोल लगभग 107 रुपये और डीजल करीब 97 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है, जबकि हाल के दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है।
ऊर्जा संकट से प्रभावित प्रमुख देशों में भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, फिलीपींस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, वियतनाम, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम, तुर्किये, दक्षिण अफ्रीका और केन्या शामिल हैं। इन देशों को आयात लागत, परिवहन खर्च, महंगाई और औद्योगिक उत्पादन पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर तेल उत्पादक देशों जैसे ईरान, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और लीबिया में ईंधन अपेक्षाकृत सस्ता है, क्योंकि वहां सरकारें सब्सिडी और घरेलू उत्पादन के बल पर कीमतों को नियंत्रित रखती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। भारत सहित कई देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा, वैकल्पिक ईंधन और घरेलू उत्पादन बढ़ाना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन सकता है।