
दंडकारण्य दर्पण
विश्व पर्यावरण दिवस 2026
दंडकारण्य दर्पण
विश्व पर्यावरण दिवस 2026
हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
रायपुर। प्रकृति मानव जीवन का आधार है। स्वच्छ हवा, शुद्ध जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता न केवल जीवन को सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान को भी मजबूत करते हैं। बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है।
प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन कर रही है।
राज्य में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। हरियाली प्रसार योजना और किसान वृक्ष मित्र योजना के माध्यम से किसानों को पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे हरित क्षेत्र का विस्तार होने के साथ किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
एक पेड़ मां के नाम अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस पहल के माध्यम से लोग अपनी माताओं के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रहा है।
शहरी क्षेत्रों में भी हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए ऑक्सीवन योजना के तहत ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। पर्यावरण वानिकी योजना के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण और सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों से प्रदूषण नियंत्रण के साथ नागरिकों को बेहतर और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो रहा है।
जल संरक्षण के क्षेत्र में भी राज्य सरकार द्वारा अनेक अभिनव पहल की गई हैं। मोर गांव मोर पानी और मोर गांव मोर तरिया जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ा रहे हैं। तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।
नदियों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। नदी तट वृक्षारोपण योजना के तहत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है, जिससे मिट्टी कटाव रोकने, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है। वहीं महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय हरित कोर योजना और ईको क्लब कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण जैसे कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जल की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग, पौधारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग जैसे छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की आधारशिला बन सकते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस का संदेश स्पष्ट है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित सोच को आगे बढ़ा रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझते हुए पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य प्रदान किया जा सकता है।
धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए इसकी रक्षा करना हम सभी की सामूहिक और नैतिक जिम्मेदारी है।
रायपुर। प्रकृति मानव जीवन का आधार है। स्वच्छ हवा, शुद्ध जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता न केवल जीवन को सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान को भी मजबूत करते हैं। बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है।
प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन कर रही है।
राज्य में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। हरियाली प्रसार योजना और किसान वृक्ष मित्र योजना के माध्यम से किसानों को पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे हरित क्षेत्र का विस्तार होने के साथ किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
एक पेड़ मां के नाम अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस पहल के माध्यम से लोग अपनी माताओं के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रहा है।
शहरी क्षेत्रों में भी हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए ऑक्सीवन योजना के तहत ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। पर्यावरण वानिकी योजना के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण और सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों से प्रदूषण नियंत्रण के साथ नागरिकों को बेहतर और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो रहा है।
जल संरक्षण के क्षेत्र में भी राज्य सरकार द्वारा अनेक अभिनव पहल की गई हैं। मोर गांव मोर पानी और मोर गांव मोर तरिया जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ा रहे हैं। तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।
नदियों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। नदी तट वृक्षारोपण योजना के तहत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है, जिससे मिट्टी कटाव रोकने, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है। वहीं महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय हरित कोर योजना और ईको क्लब कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण जैसे कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जल की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग, पौधारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग जैसे छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की आधारशिला बन सकते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस का संदेश स्पष्ट है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित सोच को आगे बढ़ा रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझते हुए पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य प्रदान किया जा सकता है।
धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए इसकी रक्षा करना हम सभी की सामूहिक और नैतिक जिम्मेदारी है।